जब किसी आरोपी पर कोई मामला भोपाल के न्यायालय में दर्ज हुआ है एवं वह आरोपी व्यक्ति दिल्ली में निवास करता है तब दिल्ली के न्यायालय अर्थात आरोपी का स्थानीय न्यायालय का क्या कर्तव्य होगा या दिल्ली के आरोपी पर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर आदि के न्यायालय में भी मामला दर्ज है तब स्थानीय अधिकारिता वाला न्यायालय मामले की जाँच कैसे करेगा एवं किसे जाँच रिपोर्ट भेजेगा जानिए।
दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 187 की परिभाषा:-
1. अगर किसी स्थानीय अधिकारिता क्षेत्राधिकार रखने वाले न्यायालय को लगता है कि उसकी अधिकारिता क्षेत्र में ऐसा आरोपी निवास करता है जिसके आरोप का विचारण (सुनवाई) अन्य न्यायालय में या भारत के बाहर किसी न्यायालय में चल रही है, तब स्थानीय क्षेत्र का न्यायालय ऐसे आरोपी की समन, वारण्ट भेज सकता है एवं ऐसे आरोपी की जाँच करवाने का अधिकार रखता है।
अगर आरोपी का अपराध आजीवन कारावास या मृत्यु दंड से प्रावधानित नहीं है तब स्थानीय क्षेत्राधिकार का न्यायालय या प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट आरोपी को शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ सकता है।
2. कभी कभी स्थानीय क्षेत्राधिकार का न्यायालय यह पता नहीं लगा पता है कि आरोपी पर लगाये गए आरोप का विचारण किस न्यायालय का है तब स्थानीय अधिकारिता रखने वाला न्यायालय आरोपी की जांच करवा कर रिपोर्ट को राज्य के उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) भेजेगा।
नोट:- यहाँ अपराध वही होंगे जिसका उल्लेख हमने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 177 से 185 में किया हैं। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
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