भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आज देवास जिले के हाटपिपलिया में एक जनसभा के दौरान कहा कि आप लोगों ने देखा है कि कैसे हमारी चुनी हुई सरकार को सौदेबाजी कर गिरा दिया गया। मैंने प्रदेश की पहचान बदलने का काम किया। क्या यह मेरा गुनाह था? हां, मेरा गुनाह यह जरूर था कि मैंने सौदेबाजी नहीं करी, क्योंकि यह कांग्रेस की संस्कृति व सिद्धांत नहीं है। यदि मैं भी सौदे की राजनीति करता तो आज प्रदेश में यह उपचुनाव नहीं होते।
कमलनाथ ने इस अवसर पर कहा कि सभा में उपस्थित विशाल जनसैलाब को देखकर मेरा खून बढ़ गया है, यह भीड़ सरकारी भीड़ नहीं है, लाई हुई भीड़ नहीं है, यह तो अपनी मर्जी से आई हुई भीड़ है। शिवराज जी की सभाओं में अधिकारियों को भीड़ लाने के टारगेट दिए जाते हैं, आज बेचारे अधिकारी नौकरी बचाने के लिए शिवराज जी की सभाओं में भीड़ इकट्ठे कर रहे हैं। मैं आपको यह बताना नहीं चाहता हूं कि प्रदेश पर उपचुनावों का बोझ क्यों आया, यह आप सब भली भांति जानते हैं। चुनाव तो प्रजातंत्र का त्यौहार होता है क्या यह त्यौहार है? भाजपा ने प्रजातंत्र व संविधान के साथ खिलवाड़ किया। हमने वोटों से सरकार बनाई और इन्होंने नोटों से। बाबासाहेब आंबेडकर ने नेहरू जी के साथ मिलकर जिस संविधान की स्थापना की थी, उस सविधान के साथ इन्होंने खिलवाड़ किया, प्रदेश में बिकाऊ राजनीति की शुरुआत की। प्रदेश पर उपचुनाव का बोझ डाल दिया लेकिन भाजपा यह जान लें कि छोटा सौदा छुप जाता है लेकिन बड़ा सौदा छुपता नहीं।
इस अवसर पर सभा को क्षेत्र के प्रभारी और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, राजेंद्र सिंह बघेल, कुणाल चौधरी, जिला अध्यक्ष अशोक पटेल आदि ने संबोधित किया। सभास्थल पर मंच पर पूर्व विधायक श्याम होलानी, कैलाश कुंडल, पंडित कृपाशंकर शुक्ला, छगनलाल मिस्त्री, शांतिलाल गामी आदि उपस्थित थे। सभा का संचालन मनोज राजानी ने किया।
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