भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया के दो समर्थक एवं कद्दावर नेता गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट को सांत्वना स्वरूप प्राप्त हुआ मंत्री पद उप चुनाव की वोटिंग से पहले छीन लिया जाएगा क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया की कृपा से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए मंत्री पद की लिमिट खत्म होने वाली है। दरअसल, यह मंत्रीपद एक प्रीपेड रिचार्ज प्लान की तरह था। इसकी वैलिडिटी 6 महीने थी। इससे पहले दोनों को चुनाव लड़कर विधायक बनना था परंतु ऐसा नहीं हो पाया।
भारत के संविधान में मुख्यमंत्री को यह अधिकार दिया है कि वह किसी भी आम नागरिक को मंत्री पद प्रदान कर सकते हैं परंतु इसके साथ शर्त यह है कि शपथ ग्रहण के 6 महीने के भीतर विधिवत चुनाव लड़कर विधायक बनना होगा। श्री कमलनाथ भी इसी सुविधा और शर्त के तहत सांसद होते हुए मुख्यमंत्री बन गए थे और मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा चुनाव लड़ा।
गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट ने कांग्रेस और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद 21 अप्रैल को भाजपा की सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इस हिसाब से 21 अक्टूबर को दोनों नेताओं के मंत्री पद की वैलिडिटी खत्म होने वाली है। 22 अक्टूबर को दोनों नेता एक आम नागरिक की तरह चुनाव प्रत्याशी होंगे। 10 नवंबर को यदि दोनों जीत भी गए तब भी फिर से मंत्री पद की शपथ लेनी होगी है। मजेदार बात यह है कि इस अवधि के बीच में किसी अन्य व्यक्ति को मंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई जा सकती है। दोनों मंत्रियों के सभी विभाग मुख्यमंत्री के पास चले जाएंगे।
मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार 14 मंत्री उपचुनाव लड़ रहे हैं
मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार और आएगी जब 14 नेता पहले मंत्री बन गए और अब विधायक बनने के लिए उपचुनाव लड़ रहे हैं। वैसे बैक डोर से सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का खेल नया नहीं है। श्री शिवराज सिंह चौहान भी विदिशा से सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बन गए थे और फिर बाद में उन्होंने बुधनी विधानसभा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा। श्री कमलनाथ की 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ने से डर गए थे। जब कांग्रेस को बहुमत मिल गया तब उन्होंने पहले मुख्यमंत्री पद की शपथ ली सांसद पद से इस्तीफा दिया और मुख्यमंत्री रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा।
इन 14 मंत्रियों में इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, प्रभुराम चौधरी, हरदीप सिंह डंग, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, बिसाहूलाल सिंह, एदल सिंह कंसाना, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, ओपीएस भदौरिया और गिर्राज दंडोतिया शामिल हैं।
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