जबलपुर। मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय ने इंजीनियर विनोद कुमार जैन के मामले में शासन को निर्देशित किया है कि वह उनके रिटायरमेंट से पहले विभागीय जांच पूरी करें ताकि रिटायरमेंट के बाद उनके स्वत्तों के भुगतान में कोई विवाद ना हो।
श्री विनोद कुमार जैन, कार्यपालन यंत्री को कथित रूप से मुख्य मंत्री ग्राम सड़क योजना के निर्माण में अनियमितता के कारण, सिविल सेवा नियम 1966 के अनुपालन में निलंबित करके विभागीय जांच निर्देशित की गई थी। श्री जैन को दिनाँक 30/11/21 को सेवा निवृत्त होना है। लंबित विभागीय जांच के कारण, सेवानिवृत्त होने के बाद उनके स्वत्तों के भुगतान में समस्या हो सकती थी। उपरोक्त कारणों के आधार पर, श्री जैन के द्वारा हाई कोर्ट जबलपुर में रिट याचिका दायर कर विभागीय जांच जल्दी समाप्त किये जाने संबंधी निर्देश का अनुतोष मांगा था।
श्री जैन की ओर से अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी द्वारा कोर्ट का बताया गया कि विभागीय जांच को अनिश्चित काल तक पेंडिंग नहीं रखा जा सकता है। उन परिस्थितियों में जबकि कर्मचारी को सेवानिवृत्त होना है। ऐसे में कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद उसके सेवानिवृत्ति भुगतान में कठिनाई होगी। पेंशन संबंधी समस्या को विचार में रखते हुए, विभाग को निर्देश जारी किए जाएंगे वह रिटायरमेंट से पहले डिपार्टमेंटल इंक्वायरी पूरी करें।
दलीलों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने डिपार्टमेंट के हेड ऑफिसर स्कोर आदेश जारी किया है कि वह रिटायरमेंट से पूर्व डिपार्टमेंटल इंक्वायरी पूरी करें। मध्य प्रदेश के कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण समाचारों के लिए कृपया MP karmchari Samachar पर क्लिक करें
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