नई दिल्ली। एक बार फिर पत्रकारिता का एक जन हितेषी अभियान सफल हुआ है। यह अभियान भारत के निर्धन एवं निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के हितों में था। राजनीतिक पार्टियां जब बिहार और भारत भर के उपचुनाव में व्यस्त थी तब सरकारी बैंकों ने खाताधारकों पर सेवा शुल्क की वसूली के लिए नियमों में परिवर्तन करना शुरू कर दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा ने नए नियम लागू कर दिए थे लेकिन भारत में आम नागरिकों के हितों के लिए काम करने वाली मीडिया समूह के संयुक्त अभियान के कारण बैंक ऑफ बड़ौदा को अपना फैसला स्थगित करना पड़ा।
जनधन और बुनियादी बचत बैंक खातों पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा बताया गया है कि जन धन खातों सहित बुनियादी बचत बैंक जमा (BSBD) खाते – भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा निर्धारित मुफ्त सेवाओं के लिए समाज के गरीब और बैंकों से अछूते रहे तबकों द्वारा खोले गए 41.13 करोड़ जन धन खातों सहित 60.04 करोड़ बुनियादी बचत बैंक जमा (BDBD) खातों पर कोई सेवा शुल्क लागू नहीं है।
बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा घटाई गई विड्रोल लिमिट फिर से बढ़ा दी गई
नियमित बचत खाते, चालू खाते, नकद उधार खाते और ओवरड्राफ्ट खाते: इस संबंध में, शुल्क तो नहीं बढ़ाया गया है, लेकिन बैंक ऑफ बड़ौदा ने 1 नवंबर, 2020 से प्रति माह मुफ्त नकद जमा और निकासी की संख्या के संबंध में कुछ परिवर्तन किए थे। मुफ्त नकद जमा एवं निकासी की संख्या प्रति माह 5 से घटाकर प्रति माह 3 कर दी गई है, जिसमें इन मुफ्त लेनदेन से अधिक लेनदेन के लिए शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने सूचित किया है कि वर्तमान कोविड से जुड़ी स्थिति के आलोक में, उन्होंने इन परिवर्तनों को वापस लेने का निर्णय लिया है।
कोई भी सरकारी बैंक शुल्क वसूली के लिए नियमों में परिवर्तन नहीं करेगा
भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पीएसबी सहित सभी बैंकों को उचित, पारदर्शी और भेदभावरहित तरीके से अपनी सेवाओं के एवज में इस पर आने वाले लागतों के आधार पर शुल्क लगाने की अनुमति है। लेकिन अन्य पीएसबी ने भी यह सूचित किया है कि कोविड महामारी के मद्देनजर निकट भविष्य में बैंक शुल्कों में बढ़ोतरी करने का उनका कोई प्रस्ताव नहीं है।
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