भोपाल। मध्यप्रदेश के राजगढ़ में कलेक्टर निधि निवेदिता पर लगे एक पुलिस अधिकारी को थप्पड़ मारने के आरोप की जांच करने के लिए इन्वेस्टिगेशन टीम राजगढ़ पहुंची और करीब 1 दर्जन अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की। इन्वेस्टिगेशन की पूरी प्रक्रिया को सीक्रेट रखा गया। पूछताछ के बाद इन्वेस्टिगेशन टीम वापस लौट गई। बताया जा रहा है कि इन्वेस्टिगेशन का एक बिंदु कलेक्टर निधि निवेदिता का व्यवहार भी था।
राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता के एएसआई नरेश शर्मा को थप्पड़ मारने के आरोपों की जांच करने के लिए भोपाल से नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दूरसंचार उपेंद्र जैन बुधवार को राजगढ़ पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने कलेक्ट्रेट के हॉल में शिकायतकर्ता एएसआई नरेश शर्मा सहित बारह अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान इतनी गोपनीयता बरती गई कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को हॉल के आसपास भी फटकने तक नहीं दिया गया। हॉल के बाहर पुलिस का पहरा लगाकर रखा था। इस दौरान अपर कलेक्टर नवीत धुर्वे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एनएस सिसोदिया, अनुविभागीय अधिकारी श्रुति अग्रवाल, संदीप अस्थाना सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी अंदर-बाहर आते-जाते रहे। बताया जा रहा है कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी कुछ समय के लिए जांच अधिकारियों से मिले।
सूत्रों के मुताबिक जांच अधिकारियों ने राजगढ़ पहुंचने के बाद शिकायतकर्ता एएसआई नरेश शर्मा, ब्यावरा एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार, सुठालिया तहसीलदार, मलावर के नायब तहसीलदार, पुलिस के रक्षित निरीक्षक, सूबेदार, रेडियोग्राफर और छह पटवारी से एक-एक करके बात की। इस दौरान यह उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने एएसआई शर्मा को थप्पड़ लगते देखा है। घटना स्थल का माहौल कैसा था। कितने अधिकारी-कर्मचारी मौके पर मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि कलेक्टर का अधीनस्थों के साथ व्यवहार को लेकर भी जानकारी हासिल की है। दरअसल, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि भाजपा नेता को थप्पड़ मारने से पहले एक पटवारी के साथ भी ऐसी ही घटना हो चुकी है। बंद हॉल में लगभग साढ़े तीन घंटे पूछताछ करने के बाद दोनों अधिकारी अपरान्ह चार बजे भोपाल के लिए रवाना हो गए।
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