नागरिकता कानून पर सुप्रीम कोर्ट का आया ऐसा फैसला, बढ़ेगी परेशानी


सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर दायर याचिकाओं की तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि देश अभी नाजुक दौर से गुजर रहा है। जब हिंसा थमेगी, तब उन पर सुनवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस ने याचिकाओं पर आश्चर्य जताते हुए यह भी कहा कि पहली बार है जब कोई देश के कानून को संवैधानिक करार देने की मांग कर रहा है, जबकि हमारा काम वैधता जांचना है। बेंच में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत भी शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यह कोर्ट का काम है कि वह किसी कानून की वैधता की जांच करे। जब हिंसा का दौर थम जाएगा, तब कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई करेंगे। यह मामला तब सामने आया, जब एडवोकेट विनीत ढांडा ने एक याचिका दायर करते हुए उसकी जल्द सुनवाई की मांग की थी। याचिका में कहा कि सीएए को वैध घोषित किया जाए। साथ ही राज्यों को भी निर्देश दिए जाएं कि वे कानून को लागू करें। याचिका में यह भी कहा गया कि अफवाहें फैलाने के लिए कार्यकर्ताओं, छात्रों और मीडिया पर भी कार्रवाई की जाए।

नागरिकता कानून पर देशभर में हंगामा मचा हुआ है। लगातार इस मामले को लेकर राजनीति हो रही है। पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा के मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए कानून के खिलाफ आई याचिकाओं पर सुनवाई से इंकार कर दिया था। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश से आए प्रताड़ित होकर आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को इस कानून के तहत नागरिकता देने का फैसला लिया है। इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह साफ कर चुके हैं कि नागरिकता कानून में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं है। यह किसी की नागरिकता लेने नहीं, बल्कि देने का कानून है। लेकिन, कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इसके खिलाफ एकजुट हैं।



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