इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे हाईप्रोफाइल हनी ट्रैप मामले में कानून अपना काम करता नजर नहीं आ रहा है, एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र संदेह की जद में आ गईं हैं। वो पलासिया थाना पुलिस को दवाब मुक्त नहीं रख पा रहीं हैं। उन पर आरोप है कि वो स्वतंत्र जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहीं हैं। यही कारण है कि उन्होंने टीआई को लाइन अटैच कर दिया। एक एसआइ्र को इंदौर से बाहर भेज दिया और दूसरा एसआई डर के कारण छुट्टी लेकर घर चला गया।
थाना पुलिस पर बहुत दवाब है
हनी ट्रैप मामले की जांच के तीसरे दिन अचानक इंदौर में पलासिया टीआई अजीत सिंह बैस को लाइन अटैच कर दिया है। उनके स्थान पर इंदौर में रह चुके टीआई शशिकांत चौरसिया को पदस्थ किया है। जांच डायरी देखने वाले एसआई भी कुछ समय के लिए शहर से बाहर चले गए हैं और पलासिया थाना के ही एक एसआई ने घर जाने के लिए छुट्टी मांग ली है। उसका कहना है कि जब तक हनी ट्रैप का मामला यहां चल रहा है, वह थाने से दूरी बनाकर रखेगा तो ज्यादा अच्छा है। यहां काफी दबाव है।
एसएसपी ने जिस जांच को अधूरा बता सस्पेंड किया, वो तो कब की पूरी हो गई
टीआई बैस को अचानक लाइन अटैच करना कई सवाल खड़े कर रहा है। एसएसपी रुचिवर्धन मिश्र का कहना है कि टीआई पर एक पुराने नारकोटिक्स के मामले की जांच समय पर नहीं करने के लिए कार्रवाई की गई है। वहीं टीआई बैस का कहना है कि वह जांच तो मैंने पहले ही पूरी करवा दी थी। मुझे हटाने का कारण कुछ और हो सकता है। कहा जा रहा है कि टीआई बैस अफसरों की मंशा के अनुसार काम नहीं कर पाए। उनको जिस हिसाब से डायरी बनवाना थी, टीआई वैसी नहीं बना पा रहे थे।
आरोपियों लड़कियों की चुपके चुपके मदद कर रहे थे टीआई
शुक्रवार को बैस तीनों आरोपियों के मेडिकल के बाद कोर्ट में कागज पेश करने मेंं काफी देरी कर चुके थे। पता चला है कि टीआई के लाइन जाते ही एसआई खड़िया को भी इस केस से दूरी बनाने को कह दिया है और जिम्मेदारी नए टीआई शशिकांत चौरसिया व सीएसपी ज्योति उमठ को सौंपी है।
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