इंदौर। आदिम जाति कल्याण विभाग (Tribal Welfare Department) एक ओर प्राइवेट हॉस्टलों (Hostels) में छात्रों (students) को रखकर उसका लाखों रुपए किराया दे रहा है, वहीं गांधीनगर में करीब तीन साल पहले बनाया गया छात्रावास खाली पड़ा है। इस हॉस्टल के निर्माण पर विभाग करीब दो करोड़ रुपए खर्च कर चुका है।
छात्रावास का उपयोग नहीं होने विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विभाग द्वारा गांधीनगर के मॉडल स्कूल कैम्पस में प्रावीण्य उन्नयन योजना के तहत इस छात्रावास का निर्माण किया गया था। इसमें करीब 50 छात्र रह सकते हैं। छात्रावास के निर्माण के बाद विभाग ने इस योजना को ही बंद कर दिया। इसी कारण यह अभी तक तय नहीं हो सका कि इस हॉस्टल का उपयोग क्या किया जाए। उधर, इंदौर में ही विभाग के राजेंद्र नगर, वर्धमान नगर व पालदा में प्राइवेट हॉस्टलों में करीब 250 छात्र किराए के भवनों में रह रहे हैं। इनमें से करीब 50 छात्रों को विभाग चाहे तो नए हॉस्टल में शिफ्ट कर सकता है, लेकिन इस योजना पर अभी अमल ही नहीं किया।
विभाग द्वारा बनाए गए छात्रावास की इमारत का अभी तक उपयोग क्यों नहीं हुआ, इसका पता करवाता हूं। हमारा प्रयास होगा कि जल्द से जल्द इस हॉस्टल की इमारत का उपयोग शुरू हो।
गणेश भाबर, संभागीय उपायुक्त, अनुसूचित जनजाति विभाग
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