भोपाल। भोपाल-जयपुर ट्रेन से गिरकर घायल एक युवती मक्सी के जंगल में 1 घंटे तक तड़पती रही। वहां से गुजर रहे एक मजदूर की नजर पड़ी तो उसने रेलवे पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने उसे जंगल से उठाकर उज्जैन के एक निजी अस्पताल में पहुंचा दिया। इलाज के पैसे न होने के कारण घायल युवती को हमीदिया अस्पताल लाया गया। जहां मरहम पट्टी कर उसे यह कहकर घर भेज दिया गया कि हमारे यहां अभी पलंग खाली नहीं है।
गरीब एवं असहाय युवती के परिजनों से ही अस्पताल स्टॉफ ने दवाओं के साथ ही मरहम पट्टी का सामान भी मंगवा लिया। मैं जयपुर-भोपाल ट्रेन से अजमेर जा रही थी। जनरल डिब्बे में अत्यधिक भीड़ होने की वजह से खड़े रहने तक की जगह नहीं थी। ट्रेन के गेट पर खड़े रहने के लिए जगह मिली। शाम 7 बजे लोगों ने उतरने के लिए धक्का-मुक्की शुरू कर दी। उसी दौरान धक्का लगने से मैं चलती ट्रेन से गिर गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद मैं लगभग 1 घंटे तक जंगल में तड़पती रही।
बमुश्किल जीआरपी पुलिस ने उठाकर मुझे उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। दूसरे दिन मुझे घर वाले भोपाल के हमीदिया अस्पताल ले आए। यहां बेड नहीं मिलने से डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। अब मैं घर से ही रोज इलाज के लिए अस्पताल जाती हूं। फायज़ा अली, घायल युवती
बमुश्किल जीआरपी पुलिस ने उठाकर मुझे उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। दूसरे दिन मुझे घर वाले भोपाल के हमीदिया अस्पताल ले आए। यहां बेड नहीं मिलने से डॉक्टरों ने भर्ती नहीं किया। अब मैं घर से ही रोज इलाज के लिए अस्पताल जाती हूं। फायज़ा अली, घायल युवती
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