उज्जैन। जिंदगी की जटिल राहों पर क्या कुछ नहीं घटित होता। भारतीय पुलिस सेवा गुजरात कैडर के अधिकारी अविनाश जोशी ढाई महीने पहले एक होटल में अपनी माँ को लावारिस छोड़कर चले गए थे। अंकित ग्राम सेवाधाम आश्रम ने माँ की देखरेख की। ढाई महीने बाद अविनाश लौटकर आए और अपनी माँ को अपने साथ ले गए।
तीन महीने पहले दिल्ली की रहने वाली तारा जोशी अपने बेटे अविनाश जोशी के साथ महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आई थीं। दोनों यहां एक होटल में रुके थे। कुछ दिन के बाद अविनाश ने जरूरी काम बताकर जाने की इजाजत मांगी तो मां तारा जोशी ने जाने की इजाजत दे दी।
अविनाश के जाने के बाद तारा जोशी एक सप्ताह होटल में रुकीं। पैसा खत्म होने पर होटल वाले ने कलेक्टर शशांक मिश्र को इसकी सूचना दी। कलेक्टर ने उन्हें वन स्टॉप सेंटर भिजवा दिया। वहां से सेवाधाम आश्रम के संस्थापक सुधीरभाई गोयल को इसकी जानकारी मिली। जिला प्रशासन के माध्यम से वे तारादेवी को अपने आश्रम में ले आए।
गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं अविनाश जोशी
आश्रम से जुड़े लोगों ने जब मोबाइल नंबर लेकर अविनाश से संपर्क किया तो उन्होंने काम को लेकर अपनी मजबूरी बताते हुए कुछ महीने आने से असमर्थता जता दी। आखिर ढाई महीने बाद अविनाश जोशी उज्जैन आए और अपनी मां को साथ ले गए।
तारादेवी से पता चला कि अविनाश की शादी नहीं हुई है। वह सस्पेंड हो गए थे, इस वजह से परेशान था। अविनाश जोशी गुजरात कैडर के 2004 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि वे मां से बहुत प्यार करते हैं लेकिन कुछ व्यक्तिगत मजबूरियों के चलते मां को यहां छोड़ना पड़ा।
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