इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DEVI AHILYABAI VISHWAVIDYALAYA) द्वारा 1992 में किए गए विभाग 'इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज' (INTERNATIONAL INSTITUTE OF PROFESSIONAL STUDIES - IIPS) में विजिटिंग फैकल्टी भर्ती (Visiting Faculty Recruitment) में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि यहां 40 से ज्यादा विजिटिंग फैकल्टी की नियुक्ति बिना मंजूरी के ही कर ली गई। विजिटिंग फैकल्टी के काम करवाया गया। विजिटिंग फैकल्टी ने क्लास लीं, वेतन लिया यहां तक कि मूल्यांकन भी किया परंतु अब तक इनकी नियुक्तियों को मंजूरी नहीं मिली है।
पूरा सेमेस्टर बीत गया, मंजूरी नहीं ली
एमबीए, बीकॉम ऑनर्स, एमसीए और इंटीग्रेटेड एमबीए जैसे कोर्स की विजिटिंग फैकल्टी ने न केवल पूरे सेमेस्टर की क्लासेस ली, बल्कि परीक्षा लेकर मूल्यांकन भी पूरा कर लिया। ज्यादातर परीक्षाओं के रिजल्ट भी आ गए, लेकिन अब तक विजिटिंग फैकल्टी की नियुक्ति को मंजूरी नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पूरा सेमेस्टर विजिटिंग फैकल्टी की बिना मंजूरी के ही बीत गया, अगर अब किसी फैकल्टी की मंजूरी के नाम पर कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो क्या होगा?
नियम क्या हैं
सामान्य तौर पर विजिटिंग फैकल्टी की नियुक्ति की प्रक्रिया विभाग को सेमेस्टर या सत्र की शुरुआत से पहले करना होती है। मंजूरी सत्र शुरू होने के महीनेभर के भीतर हर हाल में लेना चाहिए, लेकिन यहां छह माह बीतने के बाद भी मंजूरी की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो पाई। विभाग की तरफ अब प्रक्रिया शुरू की गई है।
विभाग की तरफ से क्या कारण बताया
विभाग की तरफ से कारण बताया गया कि आधे से ज्यादा कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी थी। लोकसभा चुनाव के काफी पहले से स्टाफ ड्यूटी पर था। इस कारण प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। उसके बाद परीक्षा और रिजल्ट की प्रक्रिया में समय लगा।
अप्रैल 2018 का वेतन, जून 2019 में दिया गया
इधर, विजिटिंग फैकल्टी के वेतन में भी देरी का मामला आया है। आईआईपीएस में पढ़ा रही विजिटिंग फैकल्टी को सालभर देरी से वेतन दिया जा रहा है। अप्रैल 2018 का वेतन इस सप्ताह जारी किया गया, जबकि सामान्य तौर पर एक या दो माह की देरी होती है।
कुलपति बोले- हां चूक तो हुई है
कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ ने माना कि विभाग ने देर से मंजूरी के लिए प्रक्रिया शुरू की। मैंने कारण पूछा तो यह सामने आया कि जो स्टाफ यह जिम्मेदारी देखता है, वह पूरी तरह से चुनाव ड्यूटी में लगा था। वहीं कॉलेज प्रबंधन ने अपनी तरफ से कारण लिखित में प्रबंधन को सौंपा है, जिसमें इसका जिक्र किया गया है।
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