हाशिम अंसारी, ब्यूरो चीफ, सीतापुर (यूपी), NIT:
जनता की सुविधाओं के लिए सरकार से करोड़ों रुपए प्राप्त करने वाली नगर पालिका परिषद लहरपुर इस कार्यकाल में कुछ लोगों की निजी जागीर बन कर रह गई है। नगर पालिका के जिम्मेदार लोगों को न तो नगर की सफाई में विशेष रूचि है और न ही मनमाने तरीके से बढ़ाए गए करो से कराहती जनता की ही कोई सुध है।
नगर पालिका परिषद लहरपुर द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों पर दिन प्रतिदिन प्रश्नचिंह लगता दिखाई दे रहा है नगर पालिका क्षेत्र के मोहल्ला इंद्रानगर स्थित कब्रिस्तान बाउंड्री का विकास कार्य चरम सीमा पर है तो वहीं इस बाउंड्री से सटे रास्ते का विनाश उच्चतम सीमा पर है हाल ही में हुए नाली निर्माण कार्य में नाले की जगह पर नगर पालिका परिषद द्वारा नाली बनवाई गई जिसके बाद उस रास्ते को ऐसे ही उबड़ खाबड़ छोड़ दिया गया जिससे उस रास्ते से गुजर करने वाले राहगीरों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है बारिश के मौसम की बात की जाए तो इस रास्ते पर तो निकलना ही दुशवार हो जाता है इस पूरे प्रकरण को लेकर पालिका प्रशासन ऐसा सो रहा है जिसे जगाना शायद नगर वासियों के बस की बात नहीं है ।
पालिका प्रशासन कर रहा है मनमानी
पालिका प्रशासन द्वारा कराये जा रहे सभी कार्यों में पालिका प्रशासन अपनी मनमानी कर रहा है। हाल ही में नगर में पानी की पाइप लाइन पालिका प्रशासन द्वारा मोहल्लों एवं गलियों में डलवाई गई थी जिसके बाद उस रास्ते को ऐसे ही गड्ढा युक्त छोड़ दिया गया जिससे पैदल समेत दोपहिया वाहनों से निकलने वाले राहगीरों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है स्थानीय लोगों की माने तो आए दिन छोटे-मोटे हादसे होते रहते हैं । एवं उन गड्ढों में पानी भी भर जाता है इसके कारण नगर में बीमारी का खतरा भी मंडराता रहता है । जहां एक ओर पालिका प्रशासन स्वच्छ भारत का गुणगान कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर ऐसा विकास कार्य कराकर बीमारियों को दावत दे रहा है जहां सरकार देश को स्वच्छ एवं स्वस्थ रखने का पूर्ण प्रयास कर रही है वहीं लहरपुर को पालिका प्रशासन इस प्रयास को पूरी तरह ध्वस्त करने का प्रयत्न कर रहा है
चौपट व्यवस्था के जिम्मेदार सभासद भी हैं
इस पूरी चौपट व्यवस्था के लिए अधिशासी अधिकारी और चेयरपर्सन ही नहीं जिम्मेदार हैं बल्कि इसके लिए वह सभी सभासद भी जिम्मेदार हैं जिनके वार्डो में समुचित सफाई और मरम्मत नगर पालिका द्वारा नहीं कराई जा रही है क्योंकि सभी सभासद अपने-अपने वार्डो का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिर्फ चेयरपर्सन को कोसने से सभासद अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकते। अगर सभासदों को लगता है कि चेयरपर्सन उनकी नहीं सुनता हैं तो वह लोकतंत्र के अन्य साधनो जैसे धरना प्रदर्शन, प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा अपनी बात कह सकते हैं या फिर कोर्ट भी जा सकते हैं। जिससे नगर की जनता यह समझ सके की सभासद अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग हैं परंतु उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।
from New India Times http://bit.ly/2wrshWV

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