भोपाल। 10 साल में चौथी बार भोपाल का तालाब सूख रहा है लेकिन 10 साल में पहली बार हो रहा है कि तालाब को बचाने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। ना प्रशासन और ना ही समाजसेवी संस्थाएं। भोपाल के जो लोग 'वोट डालो देश बचाओ' का नारा लगा रहे थे, इस मामले में वो भी चुप हैं। हालात यह हैं कि भोपाल के तालाब का जल स्तर डेड स्टोरेज लेवल से नीचे पहुंच गया है।
36 वर्ग किलोमीटर का तालाब 9 वर्ग किलोमीटर रह गया
सोमवार को तालाब का लेवल 1651.95 फीट दर्ज किया गया। जबकि, रविवार को 1652 फीट यानी डेड स्टोरेज लेवल पर पहुंच गया था। पिछले साल 31 मई को तालाब डेड स्टोरेज लेवल तक पहुंचा था। तालाब का फुल टैंक लेवल (एफटीएल) 1666.80 फीट है, इस समय पानी 36 वर्ग किमी में होता है। वर्तमान में पानी का क्षेत्र सिकुड़कर 9 वर्ग किमी पर आ गया है।
इन क्षेत्रों में होगी पानी की किल्लत
अब तालाब से संबंधित क्षेत्रों में जलसंकट बढ़ेगा। क्योंकि लेवल कम होने से मोटर से पानी खींचना मुश्किल होगा। इसके अलावा जलीय खरपतवार तलहटी में जमा होने की समस्या बढ़ जाएगी। इससे पंप के वॉल्व में कचरा जमा होने से पंप खराब होंगे। साथ ही गंदा पानी आएगा, जिसका ट्रीटमेंट करने में ज्यादा केमिकल का उपयोग करना होगा। इससे पानी की गुणवत्ता खराब होगी। इस तरह पानी का लेवल घटने से इससे आए दिन पानी की सप्लाई बाधित होगी। बड़े तालाब से बैरागढ़, ईदगाह हिल्स, कोहेफिजा, शाहजहांनाबाद क्षेत्र सहित पुराने शहर में पानी सप्लाई किया जाता है। अब इन इलाकों में जलसंकट बढ़ेगा। वर्तमान में तालाब से जुड़े क्षेत्रों में कम दबाव से पानी आने की समस्या बनी हुई है।
मानसून देरी हुई तो हाहाकार मच जाएगा
तालाब का डेड स्टोरेज लेवल तय करने के पीछे मकसद होता है कि इससे अधिक पानी न लिया जाए। लेकिन पानी का मैनेजमेंट नहीं किए जाने से तालाब डेड स्टोरेज लेवल के नीचे पहुंच गया। यदि मानसून में देरी हुई तो स्थिति और विकराल हो जाएगी।
ईकोलॉजी सिस्टम पर पड़ेगा बुरा असर
डेड स्टोरेज लेवल के बाद पानी में बीओडी और सीओडी की मात्रा बढ़ने लगेगी और ऑक्सीजन की कमी होने लगेगी। इससे तालाब के अंदर जलीय जीवों के मरने की आशंका बढ़ जाएगी। इससे तालाब के पानी की गुणवत्ता खराब होगी। इससे तालाब का ईकोलॉजी सिस्टम बिगड़ने का खतरा बढ़ जाएगा।
नगर निगम को तालाब की परवाह ही नहीं
पिछले साल कम बारिश होने से तालाब एफटीएल से 6.5 फीट खाली रह गया था। ऐसे में निगम अफसर यदि गत अक्टूबर महीने से पानी की कटौती शुरू कर देते और तालाब वाले क्षेत्रों में कोलार या नर्मदा से आपूर्ति शुरू कर देते तो पानी का लेवल तेजी से नहीं घटता लेकिन मार्च महीने तक रोजाना 30 एमजीडी पानी लिया गया। अप्रैल से पांच फिर 10 एमजीडी ही पानी की कटौती की गई। जबकि, 15 एमजीडी की कटौती करने का प्लान था, जिसे लागू नहीं किया गया। बैरागढ़, ईदगाह, कोहेफिजा क्षेत्र में सिर्फ तालाब का ही नेटवर्क है, इसलिए यहां तालाब से पानी दिया जाता है। भेल, रेलवे सहित पुराने शहर वाले हिस्से में तालाब की जगह कोलार और नर्मदा से पानी दिया जा सकता था। इससे तालाब पर भार नहीं पड़ता। लेकिन इस प्लान पर अमल नहीं किया गया।
10 साल में चौथी बार सूखा तालाब
2008 में तालाब का जल स्तर 1655 फीट तक पहुंच पाया था। जल संकट से निपटने के लिए निगम प्रशासन ने अक्टूबर से ही एक दिन छोड़कर सप्लाई शुरू कर दी थी। फिर वर्ष 2009 में बारिश से पहले तालाब का लेवल 1646.45 फीट तक पहुंच गया था। कम पानी के बाद भी जलसंकट से शहरवासियों को बचाया गया। एक दिन छोड़क पानी देने की व्यवस्था वर्ष 2013 तक रही।
वर्ष 2011 में पानी डेड स्टोरेज लेवल से नीचे 1651.30 फीट तक पहुंचा था। इस समय भी एक दिन छोड़कर पानी दिया गया।
वर्ष 2018 में कम बारिश से 31 मई को तालाब 1652 फीट पहुंचा था। इसके बाद बारिश से पहले तालाब 1650 फीट तक पहुंच गया था।
अब 26 मई 2019 को तालाब 1652 फीट पहुंच गया। बारिश शुरू से पहले पानी का लेवल 1650 फीट से भी नीचे चला जाएगा।
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