नई दिल्ली। एक नेताजी ने लम्बे समय तक संगठन में काम किया। वो जिलाध्यक्ष थे। पार्टी से लोकसभा चुनाव के लिए टिकट मांगा। पार्टी ने उनकी निष्ठाओं को देखते हुए टिकट दे भी दिया। वो अधिकृत प्रत्याशी को मिलने वाले फार्म ए और बी ले आए और फिर फरार हो गए। पार्टी इंतजार करती थी। नामांकन की लास्ट डेट भी निकल गई लेकिन प्रत्याशी वापस लौटकर नहीं आया। अंतत: उसे पार्टी से निकाल दिया गया।
मामला बिहार राज्य के सीतामढ़ी लोकसभा सीट का है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे राम बाबू साह ने सीतामढ़ी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए पार्टी का टिकट तो लिया, लेकिन नामांकन नहीं किया। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने इसे पार्टी के साथ धोखाधड़ी करार देते हुए राम बाबू साह को जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया है और पार्टी से हमेशा के लिए निकाल दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह सूबे के पूर्व मंत्री नवल किशोर शाही ने इस बाबत राम बाबू साह को पत्र भी भेजा है। प्रदेश अध्यक्ष ने पत्र में कहा है कि रामबाबू साहू ने लोक सभा चुनाव लडऩे के लिए पार्टी से फॉर्म ए और बी लिया था। लेकिन उन्होंने नामांकन नहीं किया। जबकि नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गई है।
प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर शाही ने इसे दुखद और दलीय नीति-सिद्धांत के साथ धोखाधड़ी करार करार दिया है। साथ ही कहा है कि यह असहनीय है। उन्होंने पार्टी से धोखाधड़ी के आरोप में पार्टी से हमेशा के लिए निष्कासि करते हुए पार्टी की सदस्यता भी समाप्त कर दी है।
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