नई दिल्ली। 01 मार्च का पूरा दिन टीवी चैनलों ने अभिनंदन के इंतजार को समर्पित कर दिया। पाक अधिकृत कश्मीर में जाकर गिरे विंग कमांडर वाघा बार्डर पर वापस मिले। इंतजार पूरे दिन चला और रात 9:30 बजे अभिनंदन के भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही सब छुट्टी पर चले गए। इसी दिन भारत का वीर सपूत स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ पंचतत्व में विलीन हो रहा था। किसी चैनल पर उसकी चिता नजर नहीं आई। आज सोशल मीडिया इस बात को लेकर भड़क रहा है।
स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ के अंतिम संस्कार का समाचार
चंडीगढ़ से पत्रकार श्री मनोज अपरेज की रिपोर्ट के अनुसार बड़गाम में एमआई-17 हेलीकाॅप्टर क्रैश में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ का आज यहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की पत्नी स्कवाड्रन लीडर आरती वशिष्ठ ने पति को कंधा दिया। पिता जगदीश वशिष्ठ ने अपने 31 साल के शहीद बेटे को मुखाग्नि दी। सिद्धार्थ को 2018 में केरल में आई बाढ़ के दौरान रेस्क्यू अभियान में अहम भूमिका निभाने के लिए सराहना मिली थी।
पूरा घाट भारत माता के जयकारों से गूंज रहा था
शहीद सिद्धार्थ को अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। पूरा घाट भारत माता की जय और सिद्धार्थ अमर रहे के जयकारों से गूंज उठा। वायुसेना की ओर से स्कवाड्रन लीडर शहीद सिद्धार्थ को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद के सम्मान में 21 ताेपों की सलामी भी दी गई।
बेटे को अंतिम विदाई के दौरान पिता के आंसू छलके
परिवार का हौंसला बांधे हुए सिद्धार्थ के पिता भी अंतिम संस्कार की रस्मों के दौरान फूट-फूटकर रोने लगे। पिता पीएनबी बैंक से रिटायर्ड हैं। शव यात्रा के घर से निकलने से पहले आरती पति की पार्थिव देह से लिपट कर गई। घर के हर कोने से एक ही आवाज आ रही थी, हमारा बनी कहां चला गया...। शहीद सिद्धार्थ का निक नेम बनी था।
इससे पहले गुरुवार को शहीद का पार्थिव शरीर दिल्ली और फिर चंडीगढ़ लाया गया था। शहीद की पत्नी आरती वशिष्ठ वर्दी पहनकर पार्थिव देह लेने के लिए पहुंचीं। इस दौरान वायुसेना के अधिकारी भी उनके साथ रहे हैं। पूरे साहस के साथ पति का पार्थिव शरीर लेकर वह आईं। आरती भोपाल की रहने वाली हैं। सिद्धार्थ के दो साल का बेटा अंगद है।
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