भोपाल। बच्चों की पढ़ाई और पति की जॉब के कारण मैं मायके नहीं जा पाती, परंतु पति अपने माता-पिता के एक बार बुलाने पर उनके घर चले गए। उनके इस निर्णय से मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है। मैं उनके साथ नहीं रह सकती। मुझे तलाक चाहिए। यह मामला जिला सेवा विधिक प्राधिकरण ( District Service Legal Authority ) में आया है जिसकी काउंसलिंग चल रही है।
एक पत्नी ने जिला सेवा विधिक प्राधिकरण में चल रही काउंसलिंग में बताई। महिला का कहना था कि उसके पति बैंक में मैनेजर हैं। बच्चों की पढ़ाई और पति के ऑफिस के काम के कारण मैं मायके नहीं जा पाती। एक दिन मेरे ससुराल से फोन आया कि घर में पूजा है। बच्चों को लेकर आ जाओ, लेकिन मैंने कहा कि बच्चों की फाइनल परीक्षा है वे नहीं आ पाएंगे। तब सास-ससुर ने कहा कि मेरे बेटे को भेज दो। जब पति को यह बात बताई तो वे हम लोगों को छोड़कर अपने घर चले गए। उन्होंने बच्चों की परीक्षा के बारे में भी नहीं सोचा और मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाकर चले गए। इसलिए तलाक के लिए अर्जी लगाई है।
मामले में दोनों पक्षों की काउंसलिंग चल रही है। जानकारी के मुताबिक रीवा निवासी बैंक मैनेजर राजेश तिवारी (परिवर्तित नाम) की शादी ग्वालियर की स्वाति (परिवर्तित नाम) से 1998 में हुई थी। दोनों को एक बेटा व एक बेटी है। काउंसलर सरिता राजानी ने बताया कि आजकल जिला सेवा विधिक प्राधिकरण में पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर मनमुटाव को लेकर तलाक तक की बात पहुंच जा रही है। इस मामले में पति व पत्नी को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। काउंसलिंग में रिश्ते टूटने से बचाने के लिए तीन से चार बार काउंसलिंग की जाती है।
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