नई दिल्ली। भारत में एक बार फिर भगवान श्रीराम की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। राम कथाएं और उनसे जुड़े सरकारी कामों की समीक्षा शुरू हो गई है। 11 मई 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी ने नेपाल के जनकपुर से भारत के अयोध्या तक के लिए एक यात्री बस का शुभारंभ बड़ी धूमधाम से किया था। अब मधुबनी के पत्रकार श्री बरूण कुमार ने खुलासा किया है कि यह आयोजन ही फर्जी था। दोनों देशों के अधिकारियों को और सरकारों को पता था कि यह बस नहीं चलेगी, फिर भी दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने बस को झंडी दिखाई और इसका राजनीतिक लाभ लिया।
कब हुआ था शुभारंभ, क्या कहा था पीएम मोदी ने
11 मई 2018 को पीएम नरेंद्र मोदी इस बस सेवा का शुभारंभ करने के लिए नेपाल गए थे। मोदी ने इस बस सेवा का उद्घाटन करते हुए कहा था कि, ‘‘जनकपुर और अयोध्या जोड़े जा रहे हैं। यह बस सेवा नेपाल और भारत में तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने से संबंधित रामायण सर्किट का हिस्सा है। मोदी ने 20 वीं सदी के प्रसिद्ध जानकी मंदिर में पहुंचने और पूजा-अर्चना करने के बाद इस बस सेवा का शुभारंभ किया था। यह भाजपा के राममंदिर ऐजेंडा का हिस्सा माना गया था।
सब जानते थे बसें नहीं चलेंगी, एमओयू ही नही था
कि दोनों देशाें के अफसर 11 मई 2018 को ही जानते थे कि इन बसों को आज के बाद नहीं चलना है। इन बसों को चलाने के लिए दोनों देशों के बीच जरूरी करार (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) ही नहीं था। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली से बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना करा दिया।
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