अभी एक पखवारा पहले दो करोड़ की लागत से की गई थी फ्लड फाइटिंग

स्पर का पचास फीसदी हिस्सा कटा, फ्लड फाइटिंग का कार्य गंगा के गोद मे समाया

ग्रामीणों ने कहा कि “बालू की भीत पर बोल्डर की चिपरी पाथने का पोल गंगाजी खोल रही हैं”, नहीं तो यह भी कटने का कोई समय है
बैरिया(बलिया)। दुबेछपरा रिंग बंधा पर सोमवार को दोपहर ढ़ाई बजे के लगभग से गंगा की उतरती लहरों का कहर बरपना शुरू हो गया. लगभग 29 करोड़ की लागत से बनने वाले बंधे के सपोर्ट में बने स्पर के नोज के पीछे और बंधे के बीच के हिस्से वाला लगभग आधा हिस्सा गंगा मे जमींदोज हो गया. यह मंजर देख गोपालपुर, दुबेछपरा और उदईछपरा के ग्रामीढ किसी के आवाज लगाने पर बंधे की ओर दौड पड़े. समाचार लिखते समय तक स्पर का नोज दिख रहा है उसके पीछे का हिस्सा अरराता भहराता गंगा में समाता जा रहा है.
उधर बंधे पर स्पर के पूरब वाला हिस्सा जहां बीते पखवारे बंधा कट रहा था, जिस पर लगभग दो करोड़ (ग्रामीणों के अनुसार) खर्च करके फ्लड फाइटिंग का कार्य किया गया. लोहे की जाली लगा कर सीमेंट की बोरियों मे मिट्टी बालू डाले गये वहां भी मस्का कटान हो रहा है. हालात यह है कि अभी कुछ दिन पहले फ्लड फाइटिंग के दौरान वहां जो बोरियां डाली गई थी, जो सुबह तक दिख रही थी, समाचार लिखने के दौरान नहीं दिख रही हैं. अलबत्ता पहले से काफी आगे तक का हिस्सा गंगा में समा चुका है. बंधे पर कई लम्बी लम्बी दरारें दिख रही है. जो ग्रामीणों के अनुसार यह संकेत है कि दरार से लेकर आगे का हिस्सा अबेर सबेर गंगा में जाना ही जाना है. मौके पर एसडीएम लालबाबू दुबे, क्षेत्राधिकारी उमेश कुमार, तहसीलदार गुलाब चन्द्रा कोतवाल गगन राज सिंह सिंचाई व बाढ विभाग के जेई व ठेकेदार पहुंच चुके है. सीमेंट की बोरियों में मिट्टी बालू भर कर मस्का कटान वाले जगहों पर डाला जा रहा है.
गुस्से में ग्रामीण, लगाते रहे आरोप
दुबेछपरा रिंग बंधा के स्पर तथा बंधा कटने का शोर सुन पहुंचे ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिला. वह चिल्ला चिल्ला कर कह रहे थे कि जब हम लोग कह रहे थे कि बंधा ठीक नही बन रहा है तो हमारे जनप्रतिनिधि दावा करते थे कि इससे बढ़िया पूरे उत्तर प्रदेश मे कहीं काम नहीं हो रहा है. बालू का टीला खड़ा करके बोल्डर की चिपरी पाथ दी गई. ग्रामीणों का कहना था कि जो बंधा व स्पर गंगाजी के इस शांत उतरती लहर को नहीं झेल पा रहा है वह 2013 जैसा बाढ आने पर कितना देर झेलेगा. ग्रामीण जनप्रतिनिधि, नौकरशाह तथा ठेकेदार तीनो पर अपने आक्रोश का ठीकरा फोड़ रहे थे. कहना था की हम लोग तो झेलेगे सो झेलेगे लेकिन गंगा मइया ईमानदारी की सारी कलई भी खोल कर रख देगी. फिल हाल बंधे पर बचाव कार्य चल रहा है. अफरा तफरी मची हुई है.
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