मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस का क्रूर चेहरा सामने आया है.उत्तर प्रदेश की महिलाओं के साथ लगातार हो रहे अत्याचारों के बीच उनकी रक्षा करने वाली यूपी की पुलिस भी अत्याचार करने पर उतर आई है. उत्तर प्रदेश के बांदा में गैंगरेप की शिकार एक महिला को पुलिसकर्मियों ने ही थाने के अंदर पट्टों से बुरी तरह मारा. पीड़िता के शरीर पर बने जख्मों के निशान पुलिस की क्रूरता की गवाही दे रहे हैं. पहले तो पीड़िता सात महिने तक एफआईआर के लिए चक्कर काटती रही. और जब कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज हुई तो पुलिस ही पीड़िता को प्रताड़ित करने लगी. मामला बांदा के कमसिन थाना इलाके की है. पुलिस की मारपीट से व्यथित पीड़िता शरीर पर जख्म लिए SP ऑफिस पहुंची और रो-रो कर पुलिस की क्रूरता की पूरी दास्तान सुनाई. बता दें कि कमसिन थाने के दीवान व होमगार्ड सहित 6 लोगों के खिलाफ कोर्ट के आदेश के बाद रेप का केस दर्ज है.
पीड़िता का आरोप है कि पुलिस इंसाफ दिलाने के बजाय बलपूर्वक मुक़दमे से दीवान व होमगार्ड का नाम हटाने के लिए दबाव बना रही है. जानकारी के मुताबिक, दो दिसंबर, 2017 को महिला के साथ गैंगरेप हुआ था. लेकिन पुलिस पीड़िता की शिकायत पर केस नहीं दर्ज कर रही थी.
पुरे मामले में जब पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की तो महिला ने कोर्ट का सहारा लिया. आखिरकार कोर्ट के आदेश पर थाने के दीवान हरिहर नाथ शुक्ला व होमगार्ड राधेश्याम सहित चार अन्य लोगों पर रेप का केस दर्ज किया गया. लेकिन पीड़िता जब मुक़दमे की कॉपी लेने थाने पहुंची तो कमासिन थाना इंचार्ज प्रतिमा सिंह पीड़िता पर केस से दिवान व होमगार्ड के नाम हटाने का दबाव बनाने लगीं. जब पीड़िता ने इससे इनकार कर दिया प्रतिमा सिंह व अन्य पुलिसकर्मियों ने पीड़िता को पकड़ कर पट्टों से मारा.
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