
उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन, किफ़ायती मकान और स्वच्छता तीन ऐसे बड़े मुद्दे हैं जिन्हें 4200 से भी ज्यादा शहरों और कस्बों के विकास में केंद्र में रखा गया है। दूसरे स्तर पर पेयजल और सीवरेज जैसे बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े मुद्दे हैं। इन्हें 500 शहरों में लागू किया जा रहा है और तीसरे स्तर पर 100 ऐसे स्मार्ट शहर आते हैं जहां डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से शहरी बुनियादी ढांचे और सेवाओं में इजाफा करके नागरिक जीवन को और आसान बनाया जा रहा है। इससे देश में स्मार्ट शहरीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
शहरी भारत की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए पुरी ने कहा कि वैश्विक मानकों को हर हालत में निगाह में रखना होगा। हमें हर हालत में संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में काम करना होगा। स्मार्ट सिटी मिशन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके तहत 100 शहरों का चयन किया गया है और इनके विकास के लिए दो लाख पांच हजार करोड़ रुपये की लागत से 5151 परियोजनाओं का प्रस्ताव है। इसमें एक चौथाई परियोजनाओं की निविदा जारी हो चुकी है और 15 प्रतिशत पर काम भी शुरू हो गया है। शहरों को इस बात का विकल्प दिया है कि वे पुनः संयोजन, पुनर्विकास और ग्रीनफील्ड में से कोई एक मॉडल चुन सकते हैं।
प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि पिछले एक साल में प्रदेश में चार लाख से भी ज्यादा मकान स्वीकृत किए गए। बदलते शहरी परिदृश्य पर इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में एक आकर्षक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में शहरी विकास के क्षेत्र में देश के विभिन्न राज्यों में हो रहे कार्यों को मॉडल के जरिये दर्शाया गया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न राज्यों में आवास और शहरी कार्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को पुरस्कृत किया।
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