यह डिजिटल इंडिया है। इंटरनेट की मदद से एक अपराधी एक स्थान पर बैठकर कई इलाकों में अपराध कर सकता है। कई बार किसी एक आपत्तिजनक बयान के लिए कई थानों में मामले दर्ज होते हैं। सवाल यह है कि क्या आरोपी देशभर के सभी थानों में दर्ज मामलों की पेशी के लिए उससे संबंधित कोर्ट में तारीखों पर जाता रहेगा, और एक ही अपराध के लिए कई सारे कोर्ट अपने-अपने जजमेंट देंगे या फिर इसका कोई सेटेलाइट सिस्टम भी बनेगा। आइए पढ़ते हैं:-
दण्ड प्रकार संहिता, 1973 की धारा 186 की परिभाषा:-
'जहाँ एक व्यक्ति पर एक ही अपराध के मामले की सुनवाई या विचारण या जाँच दो या दो से अधिक न्यायालय द्वारा की जा रही है तब:-
1. उस राज्य का उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) अपने अधीनस्थ न्यायालय किसी भी एक न्यायालय को आदेश देगा कि कोई भी जैसा वह समझे ऐसे मामले की सुनवाई (विचारण, जाँच) कर सकता है।
2. अगर व्यक्ति का अपराध अलग अलग राज्यों के न्यायालय में विचारणीय है तब ऐसे में जिस राज्य के स्थानीय न्यायालय में पहले कार्यवाही शुरू हो गई है, वही राज्य का न्यायालय उस अपराध की सुनवाई करेगा। :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
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