भोपाल। महिला एवं बाल विकास विभाग, रतलाम में हुए आंगनवाड़ी भवन उन्नयन घोटाले में EOW ने महिला अधिकारी भारती चौहान एवं प्रेरणा चौहान और परियोजना अधिकारी मुकेश वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया है। यह घोटाला 2013-14 में हुआ था। 2016 में डिपार्टमेंटल इंक्वायरी के बाद FIR दर्ज करने के लिए मामला EOW के पास भेजा गया था। 5 साल तक इन्वेस्टिगेशन करने के बाद EOW ने FIR दर्ज की है। घोटाला सामने आते ही तीनों को सस्पेंड कर दिया गया था लेकिन EOW की देरी के कारण तीनों की सेवाएं बहाल कर दी गई थी।
महिला एवं बाल विकास विभाग- भारती चौहान, मुकेश वर्मा और प्रेरणा चौहान के खिलाफ FIR
भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि कई आंगनबाड़ी केंद्र कच्चे मकानों और झोपड़ियों में संचालित हो रहे हैं। मरम्मत, रंगाई पुताई, और बच्चों के लिए रैम्प एवम झूले जैसा कुछ भी नहीं मिला। कुछ भवनों में केवल चित्रकारी करवाई गई और पूरा पैसा खर्च होना बता दिया क्या। इस मामले में 5 साल तक इन्वेस्टिगेशन करने के बाद EOW ने महिला एवं बाल विकास विभाग की तत्कालीन परियोजना अधिकारी भारती चौहान, मुकेश वर्मा और तत्कालीन सुपरवाइजर प्रेरणा चौहान के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है।
आंगनवाड़ी भवन उन्नयन घोटाला क्या है, समझिए
MINISTRY OF WOMEN AND CHILD DEVELOPMENT GOVERNMENT OF INDIA द्वारा ICDS MISSION शुरू किया गया था। वर्ष 2013-14 में एकीकृत बाल विकास योजना के तहत प्रत्येक आंगनवाड़ी के लिए 1-1 लाख रुपए जारी किए थे जिसके अंतर्गत आंगनवाड़ी भवनों की मरम्मत ,रंगाई पुताई, बच्चों के लिए रैंप बनाने एवं झूले लगाने जैसे कार्य ग्राम पंचायत स्तर पर गठित समितियों के माध्यम से करवाए जाने थे लेकिन अधिकारियों ने समिति ना बनाते हुए डाक्यूमेंट्स में सीधे निर्माण कार्य पूर्ण होना दिखाकर बिल संलग्न किए और उनका भुगतान करना बता दिया।
समिति नहीं बनाए जाने के कारण इस मामले की शिकायत हुई एवं भौतिक सत्यापन के लिए इन्वेस्टिगेशन टीम ने सभी आंगनबाड़ियों का निरीक्षण किया। इन्वेस्टिगेशन के दौरान पता चला कि कई आंगनवाड़ी केंद्र कच्चे भवन और झोपड़ियों में चलाए जा रहे हैं। यहां एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया था। कुछ आंगनवाड़ी केंद्रों में दीवार पर चित्रकारी करवा कर पूरा पेमेंट निकाल लिया गया था।
इन्वेस्टिगेशन पूरी हो जाने के बाद अपराध पंजीबद्ध करके न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए EOW को केस ट्रांसफर कर दिया गया था। ईओडब्ल्यू ने 5 साल तक अपने स्तर पर इस मामले की इन्वेस्टिगेशन की और जून 2021 में तत्कालीन परियोजना अधिकारी भारती चौहान, मुकेश वर्मा और तत्कालीन सुपरवाइजर प्रेरणा चौहान के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
जांच पूरी होने से पहले भ्रष्टाचार के आरोपी बहाल हो चुके हैं
बहरहाल 2 करोड़ रुपए के इस घोटाले में निलंबित हुए अधिकारी फिर से बहाल भी हो चुके हैं। जिसमें से भारतीय चौहान और प्रेरणा चौहान रतलाम जिले में पदस्थ हैं वही मुकेश वर्मा उज्जैन जिले में पदस्थ है। प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपियों कि जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
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