नरसिंहपुर। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हिंदू एजेंडे पर सवाल उठाया है। शंकराचार्य ने कहा कि संघ की शाखाओं में हिंदू संस्कार पढ़ाने की जरूरत है क्योंकि संघ के शीर्ष नेतृत्व से जिस तरह बयानबाजी होती है उससे यह लगता है कि संघ को सनातन वैदिक संस्कार जो हिंदू धर्म कहलाते हैं का पता नहीं है। शंकराचार्य ने परमहंसी गंगा आश्रम के मणिद्वीप स्थल पर रविवार को पत्रकार वार्ता में यह बात कही।
RSS वाले विवाह को संस्कार नहीं अनुबंध बताते हैं
उन्होंने उदाहरण दिया कि संघ के लोग हिंदू विवाह जोकि षोडस संस्कारों में से एक प्रमुख संस्कार है उसको कांट्रेक्ट यानी करार बतलाते हैं। हिंदू धर्म में तो विवाह को सात जन्मों तक का संस्कार कहा जाता है, यह अनुबंध की श्रेणी में कैसे आ सकता है। संघ सिर्फ भारत में पैदा होने वाले को हिंदू कहता है, हिंदू तो विदेशों में भी पैदा होते हैं।
संघ को पता नहीं कि परमात्मा कौन है: साईं या राम
उन्होंने आरोप लगाया कि संघ हिंदुत्व को लेकर देश में भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। इसलिए संघ के पदाधिकारियों को हिंदू संस्कारों को जानने की आवश्यकता है। शंकराचार्य ने कहा कि संघ को यही नहीं पता कि साईं परमात्मा है या राम परमात्मा हैं, दोनों तो परमात्मा हो नहीं सकते।
संघ की नीतियां मुसलमानों और ईसाईयों जैसी हैं
शंकराचार्य ने कहा कि संघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता भैयाजी जोशी कहते हैं कि शंकराचार्य को पता नहीं है कि संघ के हजारों कार्यकर्ता साईं के भक्त हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि चाहे जो भी करो पर संघ के बैनर के नीचे आ जाओ तो सब ठीक है। यही तो मुसलमानों और ईसाईयों का भी मानना है कि हमारे धर्म में आ जाओ फिर तुम कुछ भी करो सभी पापों से मुक्त हो।
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