भोपाल। कुछ सालों पहले तक गोपनीयता और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता हुआ करते थे परंतु आप मध्य प्रदेश की सरकार के मापदंड बदल गए हैं। मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग की गोपनीयता अब रिलायंस के हाथ में चली गई है क्योंकि राजस्व विभाग के 15000 मोबाइल कनेक्शन बीएसएनएल से छीन कर रिलायंस Jio को दे दिए गए हैं।
संक्षिप्त में समझिए हुआ क्या है
जब पूरा देश कोरोनावायरस के संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा था। मध्यप्रदेश में मरने वालों की संख्या पर बहस हो रही थी। तब मध्य प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण राजस्व विभाग अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों के 15000 सरकारी मोबाइल कनेक्शनों के लिए सेवा प्रदाता कंपनी का चुनाव कर रहा था। इस प्रक्रिया में राजस्व विभाग के भाग्य विधाताओं ने BSNL का त्याग करके रिलायंस Jio का चुनाव किया। राजस्व विभाग के सचिव श्री ज्ञानेश्वर पाटिल आईएएस का तर्क है कि राजस्व विभाग का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है। इसलिए हमारे सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को इंटरनेट डाटा की जरूरत है। इसके लिए इंतजार नहीं कर सकते।
इस डील में आपत्तिजनक क्या है
भारत संचार निगम लिमिटेड की सेवाओं को त्याग कर प्राइवेट कंपनी की सेवाओं का चुनाव करने के साथ ही राजस्व विभाग एक शासकीय संस्थान के बजाय कारपोरेट कंपनी बन गया, जो फायदे के लिए कोई भी जोखिम उठाने को तैयार होती है। नियमित शासकीय कर्मचारियों पर इसलिए विश्वास किया जाता है क्योंकि उनके नौकरी छोड़कर भागने की संभावना कम होती है, लेकिन प्राइवेट कंपनी के मामले में अज्ञात कर्मचारियों पर विश्वास करना कितना उचित है, कोई भी बता सकता है। प्राइवेट कंपनी के कर्मचारियों ने पहले भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां लीक की है। भारत के कुछ पुलिस थानों में ऐसे रिकॉर्ड मौजूद है। इंटरनेट डाटा के नाम पर राजस्व विभाग के महामहिम ने गवर्नमेंट का कॉन्फिडेंशियल डाटा खतरे में डाल दिया। संभावनाओं से भयभीत ना हो तब भी एक बात तो स्पष्ट है कि सरकार की गोपनीयता सरकारी कंपनी के बाजार प्राइवेट कंपनी के हाथ में चली गई है।
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