गर्मी का मौसम कई तरह के परिवर्तन लेकर आता है। सर्दी में कोहरे के कारण घर के बाहर बगीचे में, सड़क पर या कई जगहों पर जो नमी बनी हुई थी, वह खत्म होने लगती है। सब कुछ सूखने लगता है। सभी जानते हैं कि गर्मी से पानी सूख जाता है। सवाल यह है कि यदि पानी सूख जाता है तो फिर इंसान को गर्मी से पसीना क्यों आता है।
सबसे पहले मूड फ्रेश करने वाली कुछ मजेदार जानकारी
क्या आप जानते हैं एक स्वस्थ पुरुष 1 दिन में 2500 कैलोरी ऊष्मा पैदा करता है। यह गर्मी इतनी अधिक होती है कि 23 लीटर पानी उबाला जा सकता है। अब सवाल उठता है कि जब शरीर के अंदर इतनी अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है तो शरीर का तापमान क्यों नहीं बढ़ता। जवाब सरल है। मनुष्य के मस्तिष्क में तापमान को कंट्रोल करने का एक सिस्टम मौजूद होता है। भगवान ने मनुष्य के शरीर को 37 डिग्री सेल्सियस पर फिक्स कर दिया है।
अब अपने सवाल का जवाब: इंसान को पसीना क्यों आता है
अपन लोगों ने अभी-अभी कैलोरी ऊष्मा वाला जो डिस्कशन किया है उसमें इंसान के मस्तिष्क में मौजूद तापमान को कंट्रोल करने वाला सिस्टम ही पसीने के लिए जिम्मेदार है। जैसे ही हमारे शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होने वाला होता है, यह सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। शरीर के सभी रोम छिद्र खुल जाते हैं। इनमें से थोड़ी सी नमी बाहर निकलती है और गर्म हवा के साथ झगड़ा करके आपके शरीर के तापमान को वापस कंट्रोल में ले आती है। इसीलिए गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी हो जाती है और लोगों को बार-बार प्यास लगती है। सारी चीजें एक दूसरे से कनेक्टेड है बाबू! Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article
सामान्य ज्ञानः कुछ मजेदार जानकारियां
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