इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की योग्यता पर एक बार फिर सवाल खड़ा हुआ है। b.ed चल के इतिहास के पेपर में नागरिक शास्त्र के तीन सवाल पूछे गए हैं। स्टूडेंट्स ने जब इस गलती की जानकारी यूनिवर्सिटी को दी तो बजाय सॉरी बोलने के, मामले को टालने की कोशिश करते हुए यूनिवर्सिटी ने कहा कि परीक्षा समिति से राय ली जाएगी। यह ओपन बुक एग्जाम है और स्टूडेंट्स को शुक्रवार को उत्तर पुस्तिका जमा करनी है। विद्यार्थियों को समझ में नहीं आ रहा कि गलत सवाल का जवाब दें या रहने दें।
बीएड सेकंड व एमएड थर्ड सेमेस्टर के पेपर 16 मार्च को विश्वविद्यालय ने अपलोड किए। बीएड में पुरानी और नई स्कीम वाले विद्यार्थियों ने एक साथ परीक्षा दी। इतिहास के पेपर में तीन प्रश्नों में गड़बड़ी बताई जा रही है। खंड-ए के पहले सवाल में जहां हिंदी भाषा में इतिहास के बारे में पूछा है जबकि अंग्रेजी भाषा में उसी सवाल के स्थान पर नागरिक शास्त्र के बारे में दिया है।
प्रश्न-छह में प्रजातांत्रिक नागरिकता और खंड-ब के सवाल नंबर दो में मौलिक अधिकारों के बारे में विद्यार्थियों को बताना है। विद्यार्थियों ने पेपर में गड़बड़ी के बारे में विश्वविद्यालय को जानकारी दी है। यहां तक सवाल बदलने पर जोर दिया है। 100 अंकों के सवाल में खंड-ए में 11 और ब में सभी सवाल करना है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में परीक्षा समिति से राय लेंगे। उसके बाद फैसला लिया जाएगा।
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