जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया द्वारा परिवार पेंशन से शुरू की गई वसूली की प्रक्रिया पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है। मामला एक सब इंजीनियर की विधवा पत्नी का है। याचिकाकर्ता के वकील का दावा है कि बैंक पेंशन नियमों के मामले में जांच और वसूली का अधिकार नहीं रखता।
BOI ने न नोटिस दिया ना जवाब मांगा, सीधे वसूली शुरू कर दी
श्रीमती चंदनिया भाटिया स्वर्गीय श्री चंद्र प्रकाश भाटिया की मृत्यु के पश्चात पेंशन नियम 1976 के अनुसार परिवार पेंशन वर्ष 2004 से प्राप्त कर रही थीं। श्री चंद्र प्रकाश भाटिया एनर्जी विभाग, उज्जैन में उपयंत्री के पद पर कार्यरत थे। अचनाक माह जुलाई 2020 में बिना किसी सूचना के, जब श्रीमती भाटिया किसी कार्य से बैंक शाखा गईं थी, उन्हें वसूली का गणना पत्रक थमा दिया गया। जिसके द्वारा उनकी मूल पेंशन को वर्ष 2012 से कम करते हुए लगभग 4,11,117 रुपये की वसूली 89 किस्तों में की जानी थी। गणना पत्रक के अनुसार, पेंशन से वसूली भी प्रारम्भ कर दी गई थी। उल्लेखनीय है कि श्रीमती भाटिया को बैंक द्वारा वसूली सबंधी कोई सूचना पत्र नही तामील कराया गया था।
बैंक को पेंशन नियमों के उल्लंघन में वसूली का अधिकार नहीं
बैंक ऑफ इंडिया, फ्रीगंज शाखा उज्जैन द्वारा परिवार पेंशन से की जा रही वसूली से पीड़ित होकर, श्रीमति भाटिया द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण ली गई थी। श्रीमती भाटिया के वकील श्री अमित चतुर्वेदी, उच्च न्यायालय, जबलपुर के अनुसार, बैंक पेंशन नियमों के उल्लंघन में, वसूली करने की अधिकारिता नही रखता है। जिला पेंशन अधिकारी ही पेंशन नियमों के प्रावधानों के अनुसार, पेन्शनर को युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर देने के बाद, वित्त विभाग की सहमति से ऐसा कर सकता है। पेंशन में कमी एवं वसूली दोनों ही पेंशन नियमों का अतिक्रमण है।
अधिवक्ता श्री अमित चतुर्वेदी के तर्कों से प्रथम दृष्टया सहमत होते हुए, हाई कोर्ट जबलपुर, ने बैंक ऑफ इंडिया फ्रीगंज उज्जैन, जिला पेन्शन अधिकारी उज्जैन, प्रमुख सचिव वित विभाग, मुख्य अभियंता उर्जा सुरक्षा, भोपाल को नोटिस जारी करते हुए बैंक के द्वारा की जा रही वसूली पर रोक लगा दी है।
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