बच्चे कई सवाल करते हैं। बड़े कुछ सवालों के जवाब देते हैं और जिन सवालों के जवाब नहीं आते उन सवालों को खारिज करते हुए बच्चों को कोई नई नसीहत दे देती है लेकिन क्या आप जानते हैं बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी बच्चों जैसे सवालों का हल ढूंढने के कारण महान बन जाते हैं और इतिहास में दर्ज हो जाते हैं। आज हम आपको वही कहानी बताने जा रहे हैं। एक सरल सा सवाल जिसके कारण एक व्यक्ति महान हो गया, उसे नोबेल प्राइज मिला और सारा भारत 28 फरवरी की तारीख को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाता है।
पहले एशियाई भारतीय जिन्हें फिजिक्स के क्षेत्र में नोबेल प्राइज प्राप्त हुआ
साइंस शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द scientia से हुई है। जिसका अर्थ होता है "जानना"। आज हम ऐसे भारतीय वैज्ञानिक एवं फिजिसिस्ट की बात कर रहे हैं, जिन्होंने भौतिकी (Physics) के क्षेत्र में अपना अमूल्य योगदान दिया। उनके इस काम के लिए उन्हें उन्हें 1930 में नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने रमन प्रभाव की खोज 28 फरवरी 1928 को की थी। वे ऐसे पहले एशियाई भारतीय हैं जिन्हें फिजिक्स के क्षेत्र में नोबेल प्राइज प्राप्त हुआ।
चंद्रशेखर वेंकटरमन: एक सवाल जिसने जिंदगी बदल दी
परंतु क्या आप यह जानते हैं कि चंद्रशेखर वेंकटरमन को अपनी इस खोज के लिए प्रेरणा तब मिली जब वह एक समुद्री यात्रा कर रहे थे और उन्होंने देखा कि पानी का तो कोई रंग नहीं है परंतु फिर भी समुद्र का रंग नीला क्यों और कैसे दिख रहा है?
चंद्रशेखर वेंकटरमन: 7 साल तक ढूंढते रहे एक सवाल का जवाब
और उसके बाद उन्होंने प्रत्येक पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) वस्तु पर ध्यान दिया कि उसमें रंग कहां से आया और लगातार 7 वर्षों तक रिसर्च करने के बाद उन्होंने रमन प्रभाव की खोज की और साथ ही रमन प्रभाव के लिए उपयोग में आने वाला यंत्र स्पेक्ट्रोस्कोप भी स्वयं ही विकसित किया।
रमन प्रभाव क्या है
"जब कोई एक रंग की प्रकाश किरण किसी ठोस या तरल माध्यम से होकर गुजरती है तो वह बहुत कम तीव्रता की कुछ अन्य रंगों की प्रकाश किरण देखने को मिलती हैं।"
वर्तमान समय में रमन प्रभाव का उपयोग
वर्तमान समय में फॉरेंसिक रिसर्च में, स्केनर द्वारा जांच करने में, बहुत सी इंडस्ट्रीज में रमन का उपयोग किया जाता है।
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