भोपाल। भारतीय जनता पार्टी की शिवराज सिंह सरकार म.प्र. सहकारी सोसाइटी (संशोधन) अध्यादेश, 2021 (23 जनवरी 2021) को विधानसभा के बजट सत्र में प्रस्तुत करने जा रही है। इस संशोधन के बाद मध्य प्रदेश के सहकारी बैंकों के संचालन और किसानों से लोन वसूली आदि में कई बड़े परिवर्तन होंगे।
मध्यप्रदेश में सहकारी बैंक की ब्रांच खोलने के लिए RBI की परमिशन की जरूरत नहीं
सहकारिता के विशेषज्ञों द्वारा बताया गया है कि मध्य प्रदेश में सरकार को सहकारी बैंकों की शाखाएं खोलने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति नहीं लेना होगी। उपभोक्ताओं की सुविधाओं को देखते हुए इसका विस्तार किया जा सकेगा। वहीं, अंकेक्षकों के लिए भी अलग से पैनल नहीं बनेगी। इसके लिए सरकार 22 फरवरी से होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में सहकारी अधिनियम में संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेगी।
1 अप्रैल 2021 से लागू हो जाएगा नया सहकारी अधिनियम
सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार ने बैंकिंग रेग्यूलेशन एक्ट में संशोधन किया है, जिसके आधार पर सहकारी अधिनियम में संशोधन किया जाना है। यह प्रविधान एक अप्रैल से लागू होंगे। इसके लिए बजट सत्र में संशोधन विधेयक प्रस्तुत कर अधिनियम में प्रविधान किए जाएंगे। इससे बैंकों को शाखाएं खोलने के लिए आरबीआइ की पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी।
किसानों से ऋण वसूली के लिए नाबार्ड की परमिशन नहीं चाहिए
सरकार उपभोक्ताओं की सुविधा और बैंकिंग व्यवसाय के दृष्टिगत निर्णय ले सकेगी। सहकारी समितियों का ऑडिट करने के लिए अंकेक्षकों की नई व्यवस्था बनेगी। अलग से कोई पैनल नहीं होगी। ऋण वसूली के लिए समय-समय पर लाई जाने वाली एकमुश्त समझौता योजना के लिए RBI और नाबार्ड की अनुमति लगेगी, लेकिन एक-एक प्रकरण के लिए अब यह व्यवस्था नहीं रहेगी। पंजीयक की अनुमति से बैंक ऐसा कर सकेंगे। बैंक NPA कम करने के लिए इस तरह की योजनाएं लाते हैं, जिनमें कर्जदार को ब्याज में कुछ छूट देकर वसूली की जाती है। राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक द्वारा कर्ज वसूली के लिए पूरा ब्याज माफ कर मूलधन की वसूली की योजना लाई गई थी। 23 जनवरी 2021 का गजट नोटिफिकेशन पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
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