अशफाक कायमखानी, सीकर, ब्यूरो चीफ, सीकर (राजस्थान), NIT:

भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आये पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुभाष महरिया द्वारा कांग्रेस हित में कड़ी मेहनत व आपसी सामंजस्य बनाकर व्यू रचना के साथ काम करने का परिणाम आया कि 2018 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी आठों सीटों पर भाजपा व माकपा को हार मिली। एवं आठ में से सात सीटों पर कांग्रेस विधायक एवं एक सीट पर कांग्रेस का बागी उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधायक बना जो वर्तमान में कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे है लेकिन ज्योंही विधानसभा चुनाव हुये उसके बाद बने विधायकों का रुख अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग निकलना नजर आने लगा। जिसके कारण हाल ही में सम्पन्न जिला परिषद चुनाव में कांग्रेस विधायकों के मध्य आपसी सामंजस्य की कमी के कारण कांग्रेस की जीती हुई बाजी हाथ से निकल कर भाजपा के हाथों में चली गई। जिसके चलते कांग्रेस के चार मत भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में गये एवं भाजपा का जिला प्रमुख आसानी से बन गया।
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत व पायलट मे छिड़ी दौड़ मे आखिरकार गहलोत आगे निकलकर मुख्यमंत्री बन गये। पर फिर भी दोनो नेताओं के समर्थक विधायकों की मध्य पटी खाई कम होने के प्रयास नही होने के कारण चरम पर पहुंचे असंतोष के कारण जुलाई माह मे पायलट के साथ अन्य अठारह कांग्रेस विधायक गुडगांव की होटल मे पहुंच गये। काफी उठापटक के बाद कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद मसला कुछ शांत तो हुवा लेकिन पुरी तरह ठंडा नही हो पाया। इस उठापटक मे पायलट को खासा नुकसान हुवा। उन्हें प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री का पद गवाना पड़ा एवं उनके समर्थकों को सेवादल, यूथ कांग्रेस व एनएसयूसीआई प्रदेश अध्यक्ष पद भी गवाने पड़े। साथ ही दो मंत्रियों को मंत्री पद भी गवाना पड़ा था। उस समय जयपुर की एक होटल मे बाड़ेबंदी मे बंद गहलोत समर्थक विधायकों के मध्य नये प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा के बनने पर दिग्गज कांग्रेस नेता चोधरी नारायण सिंह के पूत्र व दांतारामगढ़ विधायक वीरेंद्र सिंह ने कड़ा एतराज जताने पर हलचल तेज हुई पर मुख्यमंत्री गहलोत उस समय उन्हें मनाने मे कामयाब रहे थे।
गहलोत व पायलट समर्थक विधायकों की अलग अलग बाड़ेबंदी के समय पायलट के साथ नीमकाथाना विधायक सुरेश मोदी व श्रीमाधोपुर विधायक दीपेन्द्र सिंह शेखावत थे। वही गहलोत के साथ हाकम अली, गोविंद डोटासरा, परशराम मोरदिया, राजेन्द्र पारीक, वीरेंद्र सिंह व निर्दलीय विधायक महादेव सिंह थे। लेकिन वर्तमान समय मे विधायक वीरेन्द्र सिंह भी पायलट के साथ नजर आ रहे है। वही उक्त तीनो विधायकों के अतिरिक्त जिले के अन्य विधायक अभी तक तो गहलोत के साथ नजर आ रहे है। लेकिन मंत्रीमंडल विस्तार व बदलाव के बाद ही असल मे पता चलेगा कि इनमे से कौन कोनसे विधायक तब पाला बदलते है।
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