भोपाल। मध्य प्रदेश में कोविड संक्रमण काल में शिक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। इस शैक्षणिक सत्र में ज्यादातर निजी स्कूल बंद ही रहे, सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं लगीं। राजधानी भोपाल के प्राइवेट स्कूल संचालक भी परेशान हैं। इन स्कूल संचालकों की व्यथा यह है कि अधिकांश पालक बच्चों का शिक्षण शुल्क जमा नहीं कर रहे हैं।
सरकार स्कूल खोलने की अनुमति भी नहीं दे रही है। दूसरी तरफ शिक्षकों को पूरा वेतन देना पड़ रहा है। आर्थिक संकट के कारण कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। प्राइवेट स्कूल संगठन, बैरागढ़ की सोमवार को आयोजित बैठक में स्कूल संचालकों ने अपना दर्द बयां किया। सीएमएस स्कूल में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता डॉ. मैनिस मैथ्यूज ने की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में स्कूल और अस्पताल में ही कोविड प्रोटोकॉल पूरी तरह लागू है। देशभर में सिनेमाघर और स्विमिंग पूल भी पूरी क्षमता के साथ खुल चुके हैं। कई राज्यों में स्कूल खुल चुके हैं, लेकिन भोपाल में अनुमति नहीं दी जा रही है। स्कूल बंद होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं स्कूलों को शिक्षण शुल्क नहीं मिल रहा है। यही हाल रहा तो जल्द ही स्कूलों को बंद करने की नौबत आ जाएगी। वरिष्ठ शिक्षाविद् विष्णु गेहाणी ने कहा कि बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा प्रणाली बदलने के बजाय पुरानी पद्धति से परीक्षा ली जाए और इससे पहले स्कूलों को खोलने की अनुमति भ्ज्ञी दी जाए। बसंत चेलानी ने कहा कि अब पूरा देश अनलॉक है, लेकिन स्कूल बंद हैं। यह निर्णय उचित नहीं है।
बैठक में यह तय किया गया कि स्कूल संचालक पालकों से बकाया शुल्क तत्काल जमा करने का आग्रह करेंगे। शुल्क जमा किए बगैर बच्चों को न तो अगली कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा और न ही टीसी प्रदान की जाएगी। संगठन ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री एवं शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने का निर्णय लिया है।
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