भोपाल। 200000 करोड़ के कर्ज में डूबे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कलेक्टरों से पूछा है कि खाली खजाने को भरने के लिए क्या करना चाहिए। मध्य प्रदेश के सभी कमिश्नर और कलेक्टर को निर्देशित किया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सभी अपने-अपने इन्नोवेटिव आइडिया मुख्यमंत्री को बताएंगे।
मध्य प्रदेश के गंभीर आर्थिक हालात: सरकार को संपत्ति बेचनी पड़ रही है
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र घोषित हो चुका है। विकास कार्यों के लिए बजट की जरूरत है। इधर सरकारी खजाना ना केवल खाली है बल्कि दो लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज चढ़ा हुआ है जिसका ब्याज देना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार को अपनी प्रॉपर्टी बेचने पड़ रही है। अनुपयोगी संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
बकाया वसूली के लिए डराओ, धमकाओ या फिर समझौता करो
बरसों से लंबित वसूली के लिए समझौता योजना लाई जा रही है। वाणिज्यिक कर विभाग ने ऐसी योजना लागू की है और सहकारिता विभाग भी तैयारी में है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों से कहा है कि वे उन माध्यमों को खोजें, जिनसे अतिरिक्त आय हो और उनकी निर्भरता राज्य के बजट पर कम से कम हो सके। इसके लिए पशुपालन विभाग ने बड़े स्तर पर जैविक खाद और गैस बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
जनता पर थोपे गए टैक्स कम करने का दवा
शिवराज सिंह सरकार द्वारा जनता पर थोपे गए बेतहाशा टैक्स कम करने का दबाव है। टैक्स ज्यादा होने के कारण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है लेकिन मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र नौकरशाहों का कहना है कि जब तक केंद्र से पूरी सहायता के अलावा 1% अतिरिक्त ऋण लेने की सुविधा नहीं मिलेगी तब तक जनता को राहत नहीं दी जा सकती। पिछले दिनों मुख्यमंत्री किसी के लिए दिल्ली यात्रा पर गए थे।
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