इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर शुक्रवार को वायरल हो रहा है जिसमें नगर निगम कर्मियों द्वारा कमजोर बुजुर्गों को एक गाड़ी में भरकर इंदौर-देवास हाईवे पर छोड़ने का वीडियो वायरल होने से हड़कंप मच गया। वीडियो में निगम के कुछ कर्मचारी एक बुजुर्ग कमजोर महिला और एक पुरुष बुजुर्ग को गाड़ी से उतारते और फिर बैठाते हुए दिख रहे हैं। गाड़ी में कुछ और बुजुर्ग व उनका सामान नजर आ रहा है। वीडियो शिप्रा के आसपास का बताया जा रहा है, लेकिन यह साफ नहीं हुआ है कि यह किस दिन का वाकया है।
मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने यह वीडियो शूट करते हुए बताया कि निगमकर्मी बुजुर्गों को सड़क किनारे फेंकने आए हैं और बुजुर्गों को इंदौर नगर निगम का गाड़ी में भरकर लाया गया है। जब गांव वाले वीडियो बनाने लगे और कर्मियों को फटकारा तो कर्मी उन्हें फिर गाड़ी में बैठाने लगे। ग्रामीणों ने कर्मियों से कहा कि कम से कम बुजुर्गों को इस तरह नहीं फेंकना चाहिए। नगर निगम के कर्मचारियों की संख्या तीन थी, जो यह अमानवीय काम कर रहे थे। जिस गाड़ी से बुजुर्गों को हाईवे पर बेसहारा कर छोड़ने लाया गया था, उसका नंबर एमपीएफ 7622 था और यह निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते की गाड़ी है।
अधिकारियों से पता करने पर यह कहा गया कि इस मामले की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि इसी महीने स्वच्छता सर्वेक्षण होना है और इसके चलते लगातार पांचवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने के लिए इंदौर नगर निगम कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।
ठंड के मद्देनजर बुजुर्गों को रैन बसेरा भेजने के दौरान हुई लापरवाही के मामले में वीडियो के वायरल होने के बाद निगम कमिश्नर प्रतिभा पाल ने मामले की पूरी जानकारी जुटाई। जानकारी मिलने के बाद रेन बसेरा के मस्टरकर्मी ब्रजेश लश्करी और विश्वास वाजपेयी की तुरंत प्रभाव से सेवा समाप्त कर दी गई है। निगम कमिश्नर ने किया साफ कि मामला संवेदनशील है और इसकी जांच में जहां भी लापरवाही पाई जाएगी, वहां जवाबदार कार्यवाही की जद में आएंगे।
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