भोपाल। उच्च शिक्षा विभाग सरकारी कॉलेज के प्रोफेसरों को सातवे वेतनमान का एरियर देने के लिए तैयार हो गया है। विभाग ने इसके लिए सैद्धांतिक सहमति भी दे दी है। इससे करीब 750 करोड़ स्र्पये का भार आएगा। इसमें से पचास फीसद राशि केन्द्र सरकार के खाते में से दी जाएगी। जबकि शेष पचास फीसद का भार राज्य सरकार को उठाना होगा। 

उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री मोहन यादव का कहना है कि जल्द ही सातवें वेतनमान के एरियर की राशि प्रोफेसरों के जीपीएफ खाते में डाल दी जाएगी। एरियर देने की मांग को लेकर प्रदेश महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ कैलाश त्यागी ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भी लिखा था। प्रोफेसरों के साथ यह राशि कॉलेजों में पदस्थ ग्रंथपालों और क्रीड़ा अधिकारियों को भी दी जानी है। इसका फायदा प्रदेश के करीब साढ़े 5 हजार शासकीय प्रोफेसरों/ग्रंथपालों को होगा।

प्रदेश के सरकारी कॉलेज के प्रोफेसरों को 1 जनवरी 2016 से 31 मार्च 2019 के बीच की एरियर की राशि दी जानी है। इसके लिए प्रोफेसरों ने विभाग को पत्र लिखा था। डॉ त्यागी ने बताया कि 18 जनवरी 2019 को विभाग ने प्रोफेसरों के एरियर देने को लेकर आदेश जारी किया था। इसमें स्पष्ट तौर पर वित्तीय वर्ष 2018-19 की समाप्ति के पहले सभी संबंधित प्रोफेसरों के जीपीएफ एकाउंट में एरियर की राशि जमा करने के आदेश दिए गए थे। इसके साथ ही इस वित्तीय वर्ष में प्रोफेसरों को एरियर देने के लिए सरकार ने बजट का भी प्रावधान कर दिया था। 

वित्तीय वर्ष 2019-20 समाप्त होने के भी सात महीने निकले चुके हैं, लेकिन अब तक एरियर की राशि प्रोफेसरों को नहीं मिल सकी है। डॉ त्यागी का कहना है कि एरियर की राशि अब तक नहीं मिलने की सबसे बड़ी वजह यह है उच्च शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय का अभाव है।

सातवे वेतनमान के एरियर की राशि जल्द प्रोफेसरों समेत ग्रंथपालों के खाते में जमा कर दी जाएगी। इसके लिए स्वीकृति दे दी गई है। इसके साथ पेंशन विवादों का भी जल्द समाधान करने के निर्देश दे दिए हैं।- मोहन यादव, मंत्री उच्च शिक्षा विभाग

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