जबलपुर। मध्यप्रदेश के मंडला जिले में लोक स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त ड्रेसर के प्रकरण में हाई कोर्ट, जबलपुर ने शासन से पैनल अधिवक्ता के माध्यम से 6 सप्ताह में जबाब देने के निर्देश एवं वसूली की कार्रवाई को स्थगित करने का आदेश देते हुए पूछा है कि सेवानिवृत्ति के समय दिनाँक 01/07/89 से कर्मचारी का वेतन क्यों रीफिक्स किया गया है।
श्री दिनेश पटेल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नारायनगंज, मंडला में ड्रेसर के पद पर कार्य करते हुए, दिनाँक 31/08/2020 को रिटायर हुए हैं। मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद आदेश 28/07/2020, जारी कर सूचित किया गया था कि श्री पटेल का मूल वेतन दिनाँक 07/01/89 से रुपये 775/ से घटाकर 725/ पूर्व में हुई त्रुटि के संशोधन के उद्देश्य से कर दिया गया है।
वेतन पुनर्निधारण के कारण, कर्मचारी के वेतन से 1,84,500/ उद्भूत हई थी। उक्त वसूली पर रुपये, 2,86,288/ 12% की दर से ब्याज लगाकर, कुल वसूली रुपये 4,70,789 कर्मचारी के विरुद्ध अधिरोपित की गई थी।
श्री दिनेश कुमार पटेल, सेवानिवृत्ति ड्रेसर द्वारा उच्च न्यायालय मे रिट दाखिल कर पुनर्निधारण एव वसूली के विरुद्ध उच्च न्यायालय से अनुतोष मांगा गया था। उनकी ओर से अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी, उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा कोर्ट को बताया गया है कि वर्ष 1989 से भूतलक्षी प्रभाव से मूल वेतन कम किया जाना, कर्मचारी के विरुद्ध विपरीत कार्यवाही है। विभाग द्वारा जारी आदेश मे किसी भी कारण का उल्लेख नही गया। कथित त्रुटि को संशोधन करने हेतु, प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसके अलावा 30 वर्ष पूर्व हुए निर्धारण को सेवानिवृत्ति के बाद त्रुटि पूर्ण कहना एवं मूल वेतन कम करना मनमानापन है।
उच्च न्यायालय, जबलपुर ने सुनवाई के दौरान माना कि इस प्रकार के 4 लाइन के आदेश, कर्मचारी के विरुद्ध सुनवाई के अवसर दिए बिना उचित नही माने जा सकते हैं। कर्मचारी के विरुद्ध निर्देशित वसूली को स्टे किया जाना उचित होगा।अधिवक्ता श्री अमित चतुर्वेदी की बातों से प्रचलित विधि के प्रकाश में, सहमत होते हुए, वसूली को स्टे करते हुए, पैनल अधिवक्ता को 6 सप्ताह के भीतर जबाब दाखिल करने के निर्देश दिये गए हैं।
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