वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

आपको हम एक ऐसे होनहार छात्र के बारे में बताने जा रहे है जो क्लास फोर्थ का स्टूडेंट है, इनका नाम हादी खान पुत्र शकील अहमद खान है। ये बरवर नगर के मिर्जा परिवार मिर्जा मोहम्मद इसहाक बेग कादरी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। हादी खान पढ़ने में काफी तेज़ हैं। इन्होंने लाॅकडाउन का फायदा उठाते हुए दुनियावी तालिम के साथ साथ मुस्लिम समुदाय में सबसे बेहतरीन अच्छी और सच्ची किताब कुरान पाक को लाॅकडाउन में ही मुकम्मल कर दिया। महज चार माह में कुरान पाक के तीस पारे मुकम्मल करना सात साल के बच्चे के लिए बहुत बड़ी बात है लेकिन हादी खां ने अपनी मेहनत व अपने वालिद (पिता) और वालिदा (माता) के सपनों के साथ साथ मजहबी तालिम को पूरा किया। आपको बताते चलें की मुस्लिम समुदाय में कुरान ए करीम से बड़ी कोई किताब नहीं होती है जब ये किताब बच्चे पढ़ना शुरू करते हैं तब और जब मुकम्मल यानी (खत्म पूरी) होती है तब नाते रिश्तेदार एवं दोस्त मोहल्ले में अपने खास अजीजों का मुंह मीठा कराते हैं।हादी खां महज सात साल के होने के बाबजूद चार माह में कुरान मुकम्मल कर लेने से काफी चर्चा में हैं। कुरान मुकम्मल होने के उपरांत एक दुसरे को मिठाई खिलाकर मुल्क की तरक्की व अमन चैन के लिए व इस समय फैली कोरोना जैसी बीमारी के खात्मा के लिए दुआ मांगी।
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