लॉकडाउन की वजह से विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों से किराया वसूलने को लेकर रेलवे की काफी आलोचना हो रही है। अब इसपर उसने सफाई दी है। रेलवे का कहना है कि वह मजदूरों को टिकट नहीं बेच रहा है। रेलवे ने बताया कि वह अब तक 34 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर चुका है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार रेलवे ने सोमवार को कहा, 'रेलवे राज्य सरकारों से इस वर्ग के लिए केवल मानक किराया वसूल रहा है जो रेलवे की कुल लागत का महज 15 प्रतिशत है।
वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, 'कांग्रेस ने मेहनतकश श्रमिकों व कामगारों की इस निशुल्क रेलयात्रा की मांग को बार-बार उठाया है। दुर्भाग्य से न सरकार ने एक सुनी और न ही रेल मंत्रालय ने। इसलिए, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी।'
राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, 'एक तरफ रेलवे दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों से टिकट का भाड़ा वसूल रही है वहीं दूसरी तरफ रेल मंत्रालय पीएम केयर फंड में 151 करोड़ रुपए का चंदा दे रहा है। जरा ये गुत्थी सुलझाइए।'
सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर लिखा, 'यह भारत सरकार की कैसी नैतिकता है कि वह भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूरों से उनकी यात्रा का शुल्क वसूल कर रही है। एयर इंडिया विदेश में फंसे भारतीयों को मुफ्त में वापस लेकर आई। यदि रेलवे मजदूरों का किराया देने से मना करती है तो इसे पीएम केयर्स फंड से दिया जाना चाहिए।'
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