इंदौर। इंदौर में अभी उद्योगों को उत्पादन शुरू करने के लिए और इंतजार करना होगा। सोमवार शाम MPIDC ने 317 उद्योगों को अनुमति तो जारी की है लेकिन सिर्फ माल परिवहन के लिए। सोमवार शाम फैक्ट्री संचालकों को पास जारी किए गए। अनुमति को समय सीमा में बांध दिया गया है। जारी अनुमति सिर्फ तीन दिन ही वैध रहेगी।
इंदौर के इन उद्योगों में पहले से तैयार 500 करोड़ रुपए का माल रखा हुआ है। संबंधित उद्योग 5 से 7 मई तक में प्रदेश व देश के तमाम हिस्सों में भेज सकेंगे। सोमवार दोपहर बाद 317 उद्योगों के नाम से अनुमति पत्र एमपीआईडीसी के क्षेत्रीय मुख्यालय से जारी किए गए। रीजनल डायरेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने अनुमति पत्र एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र (एआईएमपी) के उपाध्यक्ष योगेश मेहता को सौंपे। शाम को ही पोलोग्राउंड स्थित एआईएमपी दफ्तर से पदाधिकारियों ने संबधित उद्योगों के संचालकों को बुलाया और सांसद शंकर लालवानी के हाथ से पास वितरित करवाए। हर उद्योग को गिनती के पास दिए गए हैं। इसमें एक पास उद्योगपति की गाड़ी के अलावा माल भेजने के वाहनों और दो वर्करों के लिए दिया गया है। इससे ज्यादा स्टाफ फैक्ट्री में नहीं बुलाया जा सकेगा।
तीन दिन बाद ये उद्योग और माल परिवहन नहीं कर सकेंगे। खास बात ये कि अनुमति के साथ तमाम शर्तें भी जोड़ी गई हैं। माल के लिए आने वाली गाड़ियां भी रात 11 बजे से सुबह 6 बजे के बीच इंदौर में दाखिल हो सकेंगी। सिर्फ तीन दिन क्यों? उद्योगपति हैरान हैं कि लॉकडाउन में न तो शहर में सड़कों पर यातायात है, न ही लोग। ऐसे में माल लेने के लिए आने वाले ट्रकों से कोई परेशानी नहीं होना है। फिर भी सिर्फ तीन दिन का समय ही उद्योगों को क्यों दिया गया है? उसमें भी यह शर्त जोड़ने का असर होगा कि कई उद्योग तय समय में पूरा माल भी फैक्ट्री से रवाना नहीं कर सकेंगे।
सरकार को भी फायदा शहर में औद्योगिक गतिविधियां शुरू करवाने के लिए बीते दिनों से एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज प्रशासन से लगातार चर्चा कर रहा था। अभी प्रशासन ने फैक्ट्रियों को खोलने की अनुमति तो जारी नहीं की है लेकिन एसोसिएशन का सुझाव मानकर चुनिंदा उद्योगों को तय मियाद वाली अनुमति दी है। एआईएमपी के अध्यक्ष प्रमोद डफरिया के अनुसार कई उद्योग ऐसे हैं जिनके पास मई माह में अंतिम मौका था। इनके पास माल तैयार है और अगर फैक्ट्रियों में तैयार रखा ये माल बाहर नहीं भेजा जाता तो इन्हें फिर अगले साल ही मौका मिलता। इसमें ऐसे उद्योग शामिल हैं जो कृषि उपकरण बनाते हैं। कूलर रेफ्रिजरेशन से जुड़े उद्योगों के साथ वेयर हाउस के उपकरण व ढांचा बनाने वाले उद्योग भी शामिल हैं। एसोसिएशन ने ऐसे सभी उद्योगों से आवेदन मंगवाए थे। आवेदनों के साथ सूची एमपीआईडीसी को सौंपी गई थी।
एमपीआईडीसी ने सोमवार दोपहर बाद इन उद्योगों के नाम से अनुमति पत्र जारी किए। एसोसिएशन ने तुरंत सभी उद्योग संचालकों को खबर की और उन्हें पास सौंपे क्योंकि कुल तीन दिन में तय शर्तों का पालन करते हुए माल बाहर भेजना है। यह आसान नहीं होगा। इस माल के फैक्ट्री से निकलने का लाभ सरकार को भी मिलेगा। दरअसल माल की कीमत कुल करीब 500 करोड़ आंकी गई है। इस माल के फैक्ट्री से जाने पर करीब 18 प्रतिशत जीएसटी शासन के खजाने में जाएगा। माल बिकने से उद्योगपतियों के पास पैसा आ सकेगा जिससे वे कर्मचारियों का वेतन और बिजली का बिल तो जमा कर सकेंगे। माल परिवहन की अनुमति मिलने के बाद अब शहर के 473 उद्योग उत्पादन की अनुमति हासिल करने के लिए लाइन में लग गए हैं।
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