नई दिल्ली। यदि कोई अधिकारी अपनी अधीनस्थ महिला कर्मचारी को उसकी लापरवाही या असफलता के लिए डांटता है और इस दौरान वह कुछ आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग करता है तो ऐसे शब्द यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं लाए जा सकते। ऐसे शब्दों के कारण अधिकारी के खिलाफ वुमन एट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेशल) एक्ट, 2013 के तहत कार्यवाही नहीं की जानी चाहिए। शिष्टाचार की परंपरा बंद करने के कारण उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जा सकती है। यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के बाद दिया।
वुमन एट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेशल) एक्ट, 2013 का दुरुपयोग नहीं करना
हाईकोर्ट ने ट्रेडमार्क और जीआई के डिप्टी रजिस्ट्रार वी नटराजन के खिलाफ केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) द्वारा दिए गए आदेश को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा, ‘हर दफ्तर को अपना शिष्टाचार बनाए रखना पड़ता है। किसी ऑफिस के प्रमुख के पास महिला या पुरुष कर्मचारी से काम लेने के लिए अपना विवेक और विशेषाधिकार है। महिलाएं वुमन एट वर्कप्लेस (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेशल) एक्ट, 2013 का गलत उपयोग नहीं कर सकतीं। मामला 2 दिसंबर, 2013 की एक शिकायत से जुड़ा है। इसमें एक महिला ने नटराजन पर मनमानी और उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था। यह शिकायत ट्रेडमार्क एंड जीआई के रजिस्ट्रार और कंट्रोलर जनरल के पास दर्ज कराई गई थी।
रजिस्ट्रार ने यौन उत्पीड़न के मामले में एक आंतरिक समिति का गठन किया था। इसके बाद महिला ने नटराजन के खराब व्यवहार की अन्य घटनाओं को शामिल कर एक दूसरी शिकायत दर्ज कराई थी। फिर महिला ने तमिलनाडु महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा था आंतरिक समिति उसे न्याय नहीं दे सकती। तब डिस्ट्रिक्ट सोशल वेलफेयर ऑफिसर ने मामले में जांच की थी और प्राथमिक तौर पर केस दर्ज किया था। बाद में यह मामला कैट से होते हुए हाईकोर्ट पहुंचा था।
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