इंदौर। भारत सरकार की पटरियों पर दौड़ने वाली प्राइवेट ट्रेन काशी-महाकाल एक्सप्रेस की पोल खुल गई है। वाराणसी से इंदौर के लिए रवाना हुई काशी महाकाल एक्सप्रेस जब कानपुर और झांसी के बीच पहुंची तो वहां हल्की बारिश हो रही थी। ट्रेन की छत हल्की बारिश को भी सहन नहीं कर पाई। पानी बोगी के अंदर आ गया। यात्रियों का सामान और बिस्तर गीले हो गए।
काशी महाकाल एक्सप्रेस गुरुवार को दोपहर में लगभग पौने तीन बजे वाराणसी से इंदौर के लिए रवाना हो गई। ट्रेन में बैठे यात्रियों की सुविधाओं आदि पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है, लेकिन जैसे ही ट्रेन देर रात जब कानपुर से रवाना हुई और लगभग साढ़े दस बजे झांसी और कानपुर के बीच में पोखरायन स्टेशन के पास पहुंची, तभी बारिश ने स्वागत तो किया, लेकिन इस कारपोरेट ट्रेन की मजबूती की भी पोल खोल दी। हुआ यूं कि रिमझिम बारिश से ट्रेन के कोच-बी 2 की छत टपकने लगी और बिस्तर सहित अन्य समान गीला हो गया।
बताते चलें कि ये ट्रेन वाराणसी से इंदौर के बीच चलेगी, जो तीन ज्योतिर्लिंगों (श्रीओम्कारेश्वर, श्री महाकालेश्वर और काशी विश्वनाथ) को आपस में जोड़ेगी। वहीं यह ट्रेन उद्घाटन के बाद से काफी चर्चा में रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को चंदौली के पड़ाव से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया था।
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