इंदौर। सहकारिता विभाग में महिला अफसर के यौन उत्पीड़न मामले में निलंबित उपायुक्त राजेश क्षत्री का प्रकरण स्थानीय परिवाद समिति (एलसीसी) में चल रहा है। समिति ने महिला अफसर के बयान लेने के बाद क्षत्री को जवाब के लिए तीन मौके दिए, लेकिन वह हर बार गैरहाजिर रहा। समिति ने उसे नोटिस जारी कर समिति के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए। एक नोटिस क्षत्री के स्थानीय निवास के पते पर भी चस्पा किया गया, फिर भी वह नहीं आया। ऐसे में समिति ने तय किया है कि 24 फरवरी को महिला अफसर को साक्ष्य पेश करने के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद क्षत्री के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।
एलसीसी की अधिसूचित जिला अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ नेहा मीणा का कहना है कि कुछ समय पहले क्षत्री के निवास के पते पर भी नोटिस चस्पा किया गया था। उसके द्वारा भेजा गया एक पत्र एलसीसी को मिला था जिसमें लिखा था कि उसके निवास का पता बदल गया है। यह पता किसी दूसरे जिले का है। इसका मतलब है कि उसे पता है कि उनके खिलाफ एलसीसी में मामला चल रहा है और उसे नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद भी वह जानबूझकर एलसीसी के नोटिस की अवहेलना कर रहा है। क्षत्री के लिए सारे अवसर समाप्त हो चुके हैं। अब उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई तय है। अगली पेशी पर पीड़िता को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
मुख्यालय भी नहीं पहुंच रहा
सहकारिता उपायुक्त क्षत्री अपनी अधीनस्थ महिला अधिकारी को लंबे समय से परेशान कर रहा था। वह वाट्सएप पर आपत्तिजनक संदेश भेजता था। साथ ही अवांछनीय प्रस्ताव रखता था, जिसे लेकर महिला अफसर ने विरोध किया तो क्षत्री ने उसे कार्यालयीन कामकाज में परेशान करना शुरू कर दिया। महिला अफसर को इस हद तक परेशान किया कि उसे भोपाल में मंत्री और प्रमुख सचिव स्तर पर शिकायत करनी पड़ी। इसके बाद क्षत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उसका मुख्यालय भोपाल कर दिया गया। क्षत्री वहां भी नहीं पहुंच रहा है।
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