प्रशांत किशोर की रणनीति से शाम में निकले वोटर और भाजपा का किया काम तमाम


भाजपा के ज़बरदस्त और तगड़े चुनाव प्रचार के बाद आठ फ़रवरी को मतदान हुआ. देश भर की नज़रें दिल्ली पर टिकी हुई थीं. विधानसभा के लिए मतदान वोट डाले जा रहे थे. लेकिन वोटों का फीसद बढ़ नहीं रहा था. दोपहर के तीन बजे थे और लगभग सभी चैनलों में मकदान के कम फीसद को लेकर चर्चा हो रही थी. चुनाव आयोग ने भी साढ़े तीन बजे कहा कि दिल्ली में तब तक करीब चालीस फीसदही हुआ था. इसे देखते हुए सभी राजनीतिक दलों की धड़कने तेज़ थीं. आम आदमी पार्टी के नेताओं के दिलों के धड़कने भी तेज थी क्योंकि यह चुनाव पार्टी और अरविंद केजरीवाल के लिए काफी महत्त्वपूर्ण था.

दिल्ली में आदमी पार्टी के फ़िरोज़शाह रोड में बने वॉर रूम में भी हलचल थी. प्रशांत किशोर और आईपैक के तमाम कर्मचारी अपने लैपटॉप पर हर बूथ से फ़ीडबैक लेकर विश्लेषण में लगे थे. उनके साथ आप के दिल्ली चुनाव के इंचार्ज संजय सिंह भी डटे हुए थे जब तमाम नेता कम वोटिंग फीसद को लेकर परेशान नज़र आ रहे थे तब प्रशांत किशोर उन्हें समझा रहे थे कि अंत में वोट फीसद साठ फीसद के ऊपर जाएगा और अगर वोटिंग फीसद साठ से पैंसठ फीसद के बीच रहता है तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी को 55 से ज़्यादा सीटें मिलने जा रही हैं.

प्रशांत किशोर अपने साथियों से कह रहे थे जिन बूथों पर कम वोटिंग हो रही है उनका ब्योरा दें और उस ब्योरे के आधार पर प्रशांत किशोर अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह से तमाम उम्मीदवारों को फ़ोन करवा कर ज़्यादा से ज़्यादा वोटरों को बूथ तक ले जाने का संदेश दिलाते रहे. इस रणनीति का फ़ायदा यह हुआ कि चार बजे के बाद बूथों पर वोटरों की भीड़ निकली वह आम आदमी पार्टी को वोट देने निकली जिसे भाजपा नतीजों से ठीक पहले भाजपा का वोटर बताती रही. पंजाब चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल और प्रशांत किशोर की मुलाक़ात हुई थी. प्रशांत किशोर ने पंजाब विधानसभा में कांग्रेस के लिए काम किया था. मई 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को क़रारी हार का समना करना पड़ा था जिसके बाद से अनाधिकारिक तौर पर आईपैक ने दिल्ली में काम करना शुरू किया था.

आईपैक की पूरी टीम दिल्ली में घूम-घूम कर लोगों का फ़ीडबैक लेती रहीं और उसी फ़ीडबैक के आधार पर आम आदमी पार्टी के प्रचार का आधार रहे नारे या फिर पंच लाइन -अच्छे बीते पांच साल,लगे रहो केजरीवाल तैयार किया गया. प्रशांत किशोर की टीम के मुताबिक लोग उनसे बातचीत में कहते थे कि पांच साल अच्छे बीते हैं केजरीवाल को लगे रहना चाहिए यही वजह थी कि कैंपेन गीत जिसे संगीतकार विशाल डडलानी ने गाया और तैयार किया वह लोगों के फ़ीडबैक पर आधारित रहा.

पिछले साल चौदह दिसंबर को अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर प्रशांत किशोर के साथ काम करने की बात आधिकारिक की थी. दिसंबर से जो रणनीति तैयार की थी उसी के आधार पर काम शुरू हो गया सबसे पहले अरविंद केजरीवाल ने ख़ुद हस्ताक्षर किए हुए पत्र पूरी दिल्ली के 15000 प्रभावशाली शख़्सियतों को भेजे गए जिनमें व्यापारी, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षक शामिल थे. फिर आम आदमी पार्टी के पांच साल किए गए कामों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जिसे आम आदमीं पार्टी के कार्यकर्ताओं ने घर-घर तक पहुंचाया.

रिपोर्ट कार्ड के बाद जनवरी में आगले पांच साल आम आदमीं पार्टी क्या करेगी इसका गारंटी कार्ड तैयार किया गया और वोटरों के घर घर तक पहुंचाया गया. पूरे कैंपेन को दो बिंदुओं पर आधारित रखा गया विश्वसनीयता जिसका प्रचार अच्छे बीते पांच साल लगे रहो केजरीवाल के साथ किया गया और उम्मीद जिसको ध्यान में रखकर वोटिंग से कुछ दिन पहले एक और पंचलाइन का प्रचार किया गया कि अच्छे होंगे पांच साल, दिल्ली में तो केजरीवाल. होर्डिंग-पोस्टरों में इस्तेमाल हुए रंगों में भी बदलाव किया गया आम आदमी पार्टी का प्रचार बिल्कुल अलग रहा जिसके लिए नीले रंग का इस्तेमाल किया गया जो कि पहले कभी नहीं हुआ था. नतीजा सामने है. आम आदमी पार्टी ने 62 सीटों के साथ सत्ता में शानदार वापसी की और भारी-भरकम प्रचार के बाद भी भाजपा सत्ता से बहुत दूर रह गई. हालांकि भाजपा ने सत्ता पाने के लिए हर तरह का पाखंड किया. लोगों को धार्मिक आधार पर बांटा और गाली व गोली तक का नारा दिया. लेकिन लोगों ने विकास पर केजरीवाल के माथे पर फिर राजतिलक कर नफरत की सियासत को दरकिनार कर डाला.

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