नई दिल्ली। बीते रोज अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन के धमकी भरे बयान सामने आए थे। इसके तत्काल बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक में स्थित दो अमेरिकी एयरवेज पर मिसाइल से हमला कर दिया। अमेरिका ने दावा किया है कि इस हमले में उसका कोई नुकसान नहीं हुआ। बता दें कि ईरान की मस्जिद पर लाल झंडा बनाकर युद्ध का ऐलान कर दिया गया है।
ईरान के हमले के बाद पेंटागन की ओर से किए गए ट्वीट में लिखा गया है, '7 जनवरी को ईरान ने इराक में अमेरिकी सेना और गठबंधन सेना के एयरबेस पर एक दर्जन से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों दागी हैं। यह स्पष्ट है कि इन मिसाइलों को ईरान ने दागा है। ईरान ने अल-असद और इरबिल में अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एयरबेस को निशाना बनाया गया है।' अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। बता दें, सुलेमानी की मौत के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण हैं और ईरान में अमेरिका से बदला लेने की मांग जोर पकड़ चुकी है।
ईरानी लोग अमेरिका के लिए खतरा है: ब्रायन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि पिछले हफ्ते अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरान के शक्तिशाली रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स जनरल कासिम सुलेमानी अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर हमला करने और अमेरिकी राजनयिकों की हत्या करने की साजिश रच रहे थे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘वह अमेरिकी प्रतिष्ठानों और राजनयिकों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे, उन प्रतिष्ठानों में सैनिक, नाविक, एयरमैन और मरीन थे। उन्होंने हालांकि कहा कि सुलेमानी के मारे जाने से अमेरिका के खिलाफ खतरा टला नहीं है।
ब्रायन ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा, ‘जब तक दुनिया में बुरे लोग हैं तब तक अमेरिकियों के लिए हमेशा खतरा है और ईरानी लोग पिछले कई दिनों से अमेरिका के लिए खतरे पैदा कर रहे हैं।' ओ ब्रायन ने कहा, ‘हम उन लोगों को गंभीरता से लेते हैं और हम उन्हें देख रहे हैं और उन पर निगाह रख रहे हैं... राष्ट्रपति ने अपने संदेश में बहुत स्पष्ट कहा है और हम आशा करते हैं कि वे डरें और वे अमेरिका और उसके हित पर हमला करने से पहले दो बार सोचें।'
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