जबलपुर। गरीब परिवारों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान भारत योजना में हर दिन फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। ताजा मामला जबलपुर का है, जहां आर्थिक लाभ लेने के लिए एक निजी अस्पताल में एक ही परिवार के 170 आयुष्मान कार्ड बना दिए गए।
जब नेशनल हेल्थ एजेंसी (एनएचए) और स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) ने इस अस्पताल की मॉनिटरिंग की तो सारे कार्ड निरस्त कर दिए। फर्जी कार्ड बनाने वाले आयुष्मान मित्र को भी हटा दिया गया और अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दे दिया। इसके अलावा जबलपुर के ही दो अन्य निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज के बावजूद हितग्राहियों से लाखों रुपए वसूलने की शिकायत की भी जांच शुरू कर दी गई है। एनएचए ने मॉनिटरिंग में पाया कि अस्पताल की एक ही आईडी से एक ही परिवार के लिए इतने आयुष्मान कार्ड कैसे बन गए। जांच की तो आईटी सिस्टम ने फर्जीवाड़ा पकड़ लिया। एनएचए ने जानकारी एसएचए को भेजी। एसएचए ने जांच की तो गड़बड़ी सही मिली। बाद में अस्पताल की आईडी ब्लॉक कर दी गई।
आयुष्मान भारत ने 19 से 44 साल की महिलाओं के आर्थिक लाभ के लिए यूट्रस निकालने वाले उज्जैन के गुरुनानक अस्पताल के खिलाफ रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। योजना में 3 जनवरी को मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार को अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त करने के लिए पत्र लिखा गया है। योजना में अस्पताल प्रबंधन के 129 ऑपरेशन के दावे वाले 28 लाख रुपए का भुगतान भी रोक दिया गया है।
आयुष्मान भारत की मानिटरिंग में एक परिवार के बड़ी संख्या में आयुष्मान कार्ड बनने का मामला पकड़ाया था। मामला पुराना हो गया है। आयुष्मान मित्र को हटाने की कार्रवाई के साथ ही आईडी ब्लॉक कर दिया गया है। - जे विजय कुमार, सीईओ, आयुष्मान भारत योजना
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