पिछले एक साल में भारतीय रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक बन गया है। अब रुपये की हालत सिर्फ पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया की मुद्राओं से ही बेहतर है।जनवरी 2019 से अबतक एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब दो फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। सिर्फ 2019 में ही नहीं, बल्कि साल 2018 में भी रुपये की यही स्थिति थी। साल 2018 में एक साल रुपया 8 फीसदी कमजोर हुआ था।
पिछले पांच कैलेंडर वर्ष में से चार में डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत कम हुई है और पिछले 10 सालों में ऐसा आठ बार हुआ है। एक साल में रुपया डॉलर के मुकाबले एशिया की तीसरी सबसे कमजोर करेंसी साबित हुआ है। सिर्फ पाकिस्तान और दक्षिण कोरिया की मुद्राओं से ही भारतीय रुपया बेहतर है।
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