इंदौर। इंदौर-उज्जैन स्टेट हाई वे की बदहाली का मामला लोकोपयोगी लोक अदालत तक पहुंच गया है। इसे लेकर याचिका दायर हुई है जिसमें कहा गया है कि रोड का मेंटेनेंस करने के बजाय कंपनी का ध्यान सिर्फ टोल टैक्स वसूली पर है। टोल नाके से महज 500 मीटर की दूरी पर एक निजी कॉलेज है। कानूनन 500 मीटर की दूरी तक जाने के लिए टैक्स नहीं देना होता है, लेकिन कंपनी छात्रों से भी टोल वसूल रही है।
लोकोपयोगी लोक अदालत में यह याचिका एडवोकेट तेजस्वी नागर ने दायर की है। याचिका में परिवहन विभाग, MPRDC भोपाल के एमडी, इंदौर जिला कलेक्टर, टोल कंपनी और बाणगंगा थाना प्रभारी को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में इंदौर-उज्जैन रोड की बदहाली का वर्णन करते हुए कहा है कि क्षेत्र में सर्विस रोड पर अतिक्रमण हो रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। सड़क की हालत लगातार खराब हो रही है। कंपनी इसका रखरखाव करने के बजाय टोल वसूली में लगी रहती है। याचिका की सुनवाई हर माह के अंतिम शनिवार को होने वाली सुनवाई में होगी।
जिला कोर्ट में हर माह के अंतिम शनिवार को लगने वाली लोकोपयोगी लोक अदालत में कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक हित की समस्या के संबंध में याचिका दायर कर सकता है। इसकी कोई कोर्ट फीस नहीं होती। सादे कागज पर महज पांच रुपए के टिकट के साथ आवेदन किया जा सकता है। सड़क, पानी, बिजली जैसी समस्या के लिए लोकोपयोगी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है। कोर्ट दोनों पक्षों को सुनने के बाद समाधान करते हुए आदेश पारित करती है।
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