अब योगी सरकार ने भी अखिलेश सरकार के एक कानू को जनविरोधी बता कर हंगामा करने वाली भाजपा ने अब उसे चुपके से लागू कर दिया है। किसी को पता तक नहीं। ताज्जुब तो यह कि तब बीजेपी के साथ मिल कर उस कानून का विरोध करने वाली कांग्रेस के जनप्रतिनिधि भी अब चुप्पी साधे बैठे हैं।
मंदी के दौर में केंद्र हो या राज्य सरकार, खोज-खोज कर ऐसे कानून ला रही है जिन्हें उन्ही के दबाव में पूर्व सरकारों के कार्यकाल में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। ऐसे कानूनों की फाइल को झाड़ पोंछ कर चुपके से लागू कर आमजन से 10-15 गुना ज्यादा टैक्स वसूला जाने लगा है। वो भी पांच साल के एरियर के साथ। अखिलेश सरकार के कार्यकाल में भाजपा ने इस कानून को सरकारी लूट बताया था।
2013 में अखिलेश सरकार ने 2014 से राज्य सम्पत्ति कर अधिनियम के अंतर्गत भवन कर का निर्धारण किया था। तब भाजपा ने इसे जनविरोधी करार दिया था। सदन से सड़क तक भाजपा के दिग्गज व आम कार्यकर्ताओं ने अखिलेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। लेकिन अब योगी सरकार ने उसी कानून को लागू कर दिया है।जब पत्रिका ने दशाश्वमेध जोन के कर अधीक्षक से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि आवासीय भवनों के लिए यह नियम नहीं है, लेकिन जो लोग अपने आवास से कोई कमाई कर रहे हैं और जिन्होंने 2014 के बाद अपना असेसमेंट नहीं कराया है, उन्हें ही ये बिल भेजा जा रहा है।
न्यूज सोर्स : पतिका
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