भोपाल। व्यवस्था बनाना और उसे बनाए रखना ही प्रशासन का काम है लेकिन भोपाल में प्रशासन ने व्यवस्था नहीं बनाई। नतीजा 11 युवाओं की मौत हो गई। अब नवदुर्गा महोत्सव के बाद होने वाली दुर्गा प्रतिमाओं के विजर्सन के लिए नियम बनाए जा रहे हैं।
भोपाल में प्रतिमा विसर्जन के नियम
प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए विशेष क्रेनों का इंतजाम किया जाएगा।
मुंबई और हैदराबाद की तर्ज पर इन क्रेनों में प्लेटफार्म लगे होंगे।
विसर्जन के लिए श्रद्धालुओं को तालाब के भीतर नहीं जाने दिया जाएगा।
क्रेन ऑपरेटर की सहायता के लिए प्रशिक्षित गोताखोर तैनात रहेंगे।
नावों से होने वाले विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगेगी।
खटलापुरा सहित कुछ अन्य घाटों पर विसर्जन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
आयोजन समितियों को प्रतिमा स्थापना से पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
इसके साथ ही उन्हें प्रतिमा का आकार और विसर्जन का दिन व समय भी बताना होगा।
सबसे बड़ी चूक कलेक्टर भोपाल की
इस हादसे में सबसे बड़ी प्रशासनिक चूक कलेक्टर तरुण पिथोड़े की नजर आई। डीआईजी इरशाद वली का बयान भी सामने आया है कि केवल वो और उनकी पुलिस टीम प्रतिमा विसर्जन के लिए जाने वाली टीमों को रोकने और समझाने की कोशिश कर रहीं थीं। प्रशासनिक टीम उपस्थित ही नहीं थी। जहां हादसा हुआ, वहां बड़ी प्रतिमा के विसर्जन सुनिश्चित नहीं था, फिर भी प्रतिमा को विसर्जन के लिए जाने दिया गया।
हादसे के बाद मीटिंग बुलाई
कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने हादसे से 5 दिन पहले एक आदेश जारी किया था परंतु मीटिंग नहीं बुलाई थी। अब शनिवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस अफसरों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई और नियम बनाए गए ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
मुख्य सचिव एसआर मोहंती और पुलिस महानिदेशक वीके सिंह ने कलेक्टर तरुण पिथोड़े, निगमायुक्त बी विजय दत्ता और डीआईजी इरशाद वली से बात की और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम, कलेक्टोरेट और निगम दफ्तर में बैठकों का दौर चलता रहा।
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