जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत क्यों कर दिया गया। पीएससी के उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मप्र लोक सेवा एससी, एसटी एवं ओबीसी आरक्षण संशोधन विधेयक 2019 की वैधानिकता को चुनौती दी है।
जस्टिस जेके माहेश्वरी एवं जस्टिस अंजुली पालो की खंडपीठ ने प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्यविभाग, गृह विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग और मप्र लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।
भोपाल के प्रत्युष द्विवेदी, मुरैना के नीतेश जैन सहित अन्य छात्रों ने याचिका दायर कर बताया कि सरकार ने उक्त आरक्षण विधेयक में 8 जुलाई को संशोधन किया और उसके बाद 17 जुलाई को इसका राजपत्र में प्रकाशन किया। याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने कोर्ट को बताया कि मप्र सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 16 की उपधारा 4 का खुला उल्लंघन है।
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